ओडिशा की 3 बड़ी रेल प्रोजेक्ट को केंद्र की मंजूरी, ₹9450 करोड़ की लागत से बिछेंगी 320 km लंबी लाइनें
केंद्र सरकार ने ओडिशा में 9,450 करोड़ रुपये की तीन बड़ी रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनसे राज्य में लगभग 320 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछेंगी, जिससे कनेक्टिविटी, माल ढुलाई और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
केंद्र ने ओडिशा की तीन रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी।
9,450 करोड़ रुपये की लागत से 320 किमी लाइन विस्तार।
बढ़ेगी कनेक्टिविटी, माल ढुलाई और पर्यटन को मिलेगा लाभ।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा में रेल नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने राज्य से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने की जानकारी पूर्व तट रेलवे की तरफ से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी गई है। इन परियोजनाओं पर कुल 9,450 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वर्ष 2030-31 तक इन्हें पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंजूर परियोजनाओं में खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन, भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन और कटक-पारादीप (बड़बांध) तीसरी-चौथी लाइन शामिल हैं।
खड़गपुर-भद्रक के बीच 173 किलोमीटर, भद्रक-हरिदासपुर के बीच 75 किलोमीटर तथा कटक-पारादीप के बीच 72 किलोमीटर रेल लाइन का विस्तार किया जाएगा। इस तरह ओडिशा से जुड़ी इन तीन परियोजनाओं में करीब 320 किलोमीटर रेल लाइन का विस्तार होगा।
माल ढुलाई और यात्री सुविधाओं को मिलेगा लाभ
रेल लाइन की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी और व्यस्त रेल मार्गों पर दबाव कम होगा। इसका सीधा लाभ यात्रियों के साथ-साथ उद्योग और व्यापार को भी मिलेगा। कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा-इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और अनाज जैसी वस्तुओं की ढुलाई में तेजी आएगी।
चारों परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क में करीब 410 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इनसे ओडिशा समेत चार राज्यों के आठ जिलों में करीब 60 लाख लोगों और 6,448 गांवों को बेहतर रेल संपर्क मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
रेल संपर्क बेहतर होने से ओडिशा के कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान, चांदीपुर और तालसारी-उदयपुर समुद्र तट, पंचलिंगेश्वर, धवलेश्वर, सारला मंदिर और ललितगिरि जैसे स्थलों को इसका लाभ मिलेगा।
परियोजनाओं से सालाना करीब 7.6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी। साथ ही करीब 13 करोड़ लीटर तेल आयात और 65 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।
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