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    LPG की झंझट खत्म... सूरज की रोशनी से चार्ज होगा ये कुकिंग सिस्टम, रात में भी पकेगा खाना; ट्रायल सफल

    Updated: Mon, 06 Apr 2026 10:50 AM (IST)

    मध्य पूर्व तनाव के बीच ओडिशा के वैज्ञानिकों ने सौर ऊर्जा से चलने वाला आधुनिक कुकिंग सिस्टम विकसित किया है। भुवनेश्वर के एक कैफे में इसका सफल परीक्षण ह ...और पढ़ें

    ओडिशा के वैज्ञानिकों ने तैयार किया सोलर कुकर। फाइल फोटो

    ओडिशा के वैज्ञानिकों ने तैयार किया सोलर कुकर। फाइल फोटो

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते LPG की किल्लत और बढ़ती कीमतों के बीच ओडिशा से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है।

    अब खाना बनाने के लिए गैस सिलिंडर पर निर्भरता कम हो सकती है। राज्य के वैज्ञानिकों ने सोलर ऊर्जा से चलने वाला आधुनिक कुकिंग सिस्टम विकसित किया है, जिसका सफल परीक्षण भुवनेश्वर के एक कैफे में किया गया है।

    ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च के वैज्ञानिक सुधांशु शेखर साहू के नेतृत्व में तैयार इस तकनीक में सोलर कॉइल और इंडक्शन कुकिंग सिस्टम को शामिल किया गया है। यह सिस्टम पूरी तरह सौर ऊर्जा पर आधारित है, जिससे यह किफायती होने के साथ पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है।

    दिन में सीधे धूप से, रात में स्टोर ऊर्जा से चलेगा सिस्टम

    इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसका डायरेक्ट करंट आधारित होना है। दिन में सौर ऊर्जा सीधे डीसी पावर में बदलकर कुकिंग सिस्टम को चलाती है। वहीं रात के समय स्टोर की गई ऊर्जा को अल्टरनेटिंग करंट (एसी) में बदलकर बिना किसी रुकावट के खाना पकाया जा सकता है।

    कैफे में बन रही बिरयानी-पुलाव, समय भी कम लग रहा

    भुवनेश्वर के ‘गोल्डन ब्रू कैफे’ में इस सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। यहां इस तकनीक से बिरयानी और पुलाव जैसे व्यंजन कम समय में तैयार किए जा रहे हैं। सामान्यतः 2 किलोवाट का सोलर पैनल पर्याप्त होता है, लेकिन अधिक जरूरत को देखते हुए कैफे में 3 किलोवाट का सिस्टम लगाया गया है।

    एक बार निवेश, लंबे समय तक राहत

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस सिस्टम में केवल एक बार निवेश करना होता है, जिसके बाद लंबे समय तक गैस के खर्च से मुक्ति मिल सकती है। खासकर व्यावसायिक उपयोग के लिए यह तकनीक अधिक प्रभावी और भरोसेमंद साबित हो सकती है।

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    तीन लोगों की टीम ने किया कमाल

    वैज्ञानिक सुधांशु शेखर साहू ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को उन्होंने डॉ. मनोज नायक (एनआईटी नई दिल्ली) और ढेंकानाल के इलेक्ट्रिशियन संतोष स्वांई के साथ मिलकर तैयार किया है।

    पुराने कॉइल हीटिंग सिस्टम को, जो अधिक बिजली खपत के कारण बंद हो गया था, अब डीसी आधारित बनाकर दोबारा विकसित किया गया है।

    2021 में पेटेंट, 2024 में मिली मंजूरी

    इस तकनीक के लिए 2021 में पेटेंट फाइल किया गया था, जिसे 2024 में मंजूरी मिल गई। साथ ही डीसी पर इंडक्शन कुकिंग चलाने की तकनीक भी विकसित की गई है।

    ओयूटीआर में हो रहा प्रदर्शन, लागत घटाने पर काम जारी

    फिलहाल इस सिस्टम को ओयूटीआर के इनक्यूबेशन सेंटर में रखा गया है, जहां लोगों को इसका प्रदर्शन किया जा रहा है। वैज्ञानिक इसकी लागत और कम करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

    ऐसे में भुवनेश्वर जैसे शहरों में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा के विकल्प के रूप में यह सोलर कुकिंग तकनीक भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकती है।

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