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    Odisha Weather : ओडिशा में बाढ़ के बाद अब भारी बारिश का खतरा, मयूरभंज-केंदुझर में 10 अगस्त तक के लिए अलर्ट

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 12:50 PM (IST)

    ओडिशा में बाढ़ के बाद अब 5 से 10 अगस्त तक भारी बारिश का नया दौर शुरू होने वाला है, जिससे प्रभावित इलाकों में चिंता बढ़ गई है। ...और पढ़ें

    ओडिशा का मौसम ( एआई जेनरेटेड तस्वीर )

    ओडिशा का मौसम ( एआई जेनरेटेड तस्वीर )

    HighLights

    1. ओडिशा में 5 से 10 अगस्त तक भारी बारिश का पूर्वानुमान।

    2. मयूरभंज, केंदुझर के लिए ऑरेंज अलर्ट, बाढ़ प्रभावित चिंतित।

    3. मुख्य सचिव ने राहत, पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

    जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा में बाढ़ का पानी अभी पूरी तरह उतरा भी नहीं है कि एक बार फिर बारिश का नया दौर शुरू होने जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने 5 से 10 अगस्त तक राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। 

    मयूरभंज में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका को देखते हुए बुधवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 6 अगस्त को मयूरभंज के साथ केंदुझर भी ऑरेंज अलर्ट की जद में रहेगा। हालिया बाढ़ से प्रभावित जाजपुर, भद्रक और जगतसिंहपुर के कई गांवों में हालात अब भी सामान्य नहीं हुए हैं। 

    कई परिवार राहत शिविरों में रहने को मजबूर 

    दशरथपुर, बसुदेवपुर, कुजंग और तीर्थोल क्षेत्रों में जलभराव के कारण कई परिवार राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। गांवों तक जाने वाली सड़कें पानी में डूबी होने से लोग अपने घरों को नहीं लौट सके हैं। राज्य में हालिया बाढ़ ने 22 जिलों के 85 ब्लॉकों के 1,458 गांवों को प्रभावित किया है। 

    बाढ़ की चपेट में 8.63 लाख से अधिक लोग आए हैं। छह लोगों की मौत हुई, जबकि 3,567 मकान क्षतिग्रस्त हुए। ऐसे में नई बारिश की चेतावनी ने प्रभावित इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। 

    पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश 

    मुख्य सचिव अनु गर्ग ने विभागीय सचिवों के साथ समीक्षा बैठक कर राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। क्षतिग्रस्त तटबंधों की तत्काल मरम्मत, प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने और पालतू पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने को कहा गया है। 

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    उधर, ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश कम होने से महानदी और अन्य नदियों का जलस्तर घटा है। हीराकुड बांध के नौ स्लुइस गेट बंद कर दिए गए हैं और फिलहाल 13 गेटों से पानी छोड़ा जा रहा है। जल संसाधन विभाग ने कहा है कि जलाशय में पानी की आवक और निचले इलाकों में होने वाली बारिश के आधार पर जल निकासी को नियंत्रित किया जाएगा। 

    इस बीच, भद्रक के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने वाले बीजद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय दास बर्मा ने राहत व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई प्रभावित परिवारों को चावल, चूड़ा, गुड़ और पॉलीथीन जैसी आवश्यक राहत सामग्री तक पर्याप्त मात्रा में नहीं मिली। उनका दावा है कि कुछ लोगों को अपने पालतू पशुओं के साथ बैतरनी नदी के तटबंध पर खुले आसमान के नीचे शरण लेनी पड़ी।