महाप्रभु की बाहुड़ा यात्रा: पुरी में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंजा पुरी धाम
गुंडिचा मंदिर में आठ दिनों के प्रवास के बाद महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की बाहुड़ा यात्रा निकाली गई, जिसमें लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़े। ...और पढ़ें

महाप्रभु की वापसी यात्रा के लिए जगन्नाथ धाम पुरी में उमड़ा आस्था कै सैलाब
HighLights
महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की बाहुड़ा यात्रा संपन्न हुई।
लाखों श्रद्धालुओं ने 'जय जगन्नाथ' के जयघोष से पुरी को गुंजाया।
संकीर्तन, ओडिशी नृत्य और विशेष वेशभूषा ने यात्रा को भव्य बनाया।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। गुंडिचा मंदिर में आठ दिनों के प्रवास के बाद महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी, प्रभु बलभद्र जी, देवी सुभद्रा जी शुक्रवार को वापसी यात्रा निकाली गई। रथयात्रा की तरह तीनों रथों पर चतुर्धा विग्रहों को विराजमान किया गया। तमाम रीति नीति संपन्न की गई। इसके बाद जय जगन्नाथ जी के जयघोष के साथ रथ खींचने की प्रक्रिया शुरू हुई।
महाप्रभु जगन्नाथ जी की इस वापसी यात्रा के अवसर पर शुक्रवार को धर्मनगरी पुरी पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूबी नजर आई। तीनों देवताओं के दर्शन के लिए बड़दांड पर लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
भगवान जगन्नाथ नंदीघोष रथ, भगवान बलभद्र तालध्वज रथ और देवी सुभद्रा दर्पदलन रथ पर विराजमान होकर श्रीमंदिर की ओर प्रस्थान किए हैं। बाहुड़ा यात्रा को लेकर श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए हैं।

(महाप्रभु की वापसी यात्रा के लिए सुशज्जित तीनों रथ)
संकीर्तन से गूंजा बड़दांडा
बाहुड़ा यात्रा के दौरान बड़दांड पर हर ओर भक्ति का रंग देखने को मिला। श्रद्धालु 'हरे कृष्ण, हरे राम' महामंत्र का जाप करते हुए संकीर्तन में लीन नजर आए।मृदंग, झांझ और करताल की धुनों पर भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। पूरा ग्रैंड रोड भगवान जगन्नाथ के जयघोष से गूंज उठा।
ओडिशी नृत्य ने बढ़ाई उत्सव की भव्यता
तीनों रथों के सामने युवा बालिकाओं ने पारंपरिक ओडिशी नृत्य प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने बहुदा यात्रा के माहौल को और भी भव्य बना दिया।
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आपात स्थिति से निपटने को बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर
लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी और मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने बड़दांड पर विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया था। स्वयंसेवकों की मानव श्रृंखला के जरिए एंबुलेंस और दमकल वाहनों के लिए रास्ता सुरक्षित रखा गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।
नवगुंजरा और अर्जुन वेश बने आकर्षण का केंद्र
बाहुड़ा यात्रा के दौरान दो महिला श्रद्धालुओं ने नवगुंजरा और अर्जुन का वेश धारण कर सभी का ध्यान आकर्षित किया।नवगुंजरा वेश में सजी श्रद्धालु ने बताया कि यह स्वरूप भगवान के उस संदेश का प्रतीक है, जिसमें सभी जीवों में ईश्वर का वास बताया गया है। श्रद्धालुओं ने इन अनूठे धार्मिक स्वरूपों को देखने के लिए काफी उत्साह दिखाया।
हनुमान वेशधारी भक्त ने बटोरी वाहवाही
बड़दांड पर भगवान हनुमान के वेश में एक भक्त ने अपनी प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।हाथ में गदा लेकर उन्होंने नृत्य और करतब दिखाए, जिसे देखकर श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम और जय जगन्नाथ के जयकारे लगाए।
सुबह संपन्न हुईं प्रमुख नीतियां
जानकारी के मुताबिक वापसी यात्रा से पहले सुबह 8:40 बजे ‘तड़प लागी’ नीति और 8:45 से 9 बजे के बीच ‘अवकाश पूजा’ संपन्न हुई। इसके बाद रथों पर विराजमान महाप्रभु के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ गई।
वापसी यात्रा के साथ ही विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा महोत्सव अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। महाप्रभु के श्रीमंदिर लौटने के इस पावन अवसर का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से आए श्रद्धालु बड़दांडा पर डटे हुए हैं।
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