जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा पर फिर तकरार: गजपति महाराज ने इस्कॉन को लिखा पत्र, परंपराओं का पालन करने की अपील
पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने इस्कॉन को पत्र लिखकर श्रीजगन्नाथ संस्कृति से जुड़ी पारंपरिक तिथियों और अनुष्ठानों का पालन करने का आग्रह किया है। ...और पढ़ें

जगन्नाथ रथ यात्रा। फाइल फोटो
HighLights
गजपति महाराज ने इस्कॉन को पारंपरिक तिथियों पर पत्र लिखा।
स्नान यात्रा, रथयात्रा निर्धारित अवधि में ही होनी चाहिए।
इस्कॉन के उज्जैन केंद्र की योजना पर जताई चिंता।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा से पहले पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने एक बार फिर इस्कॉन को पत्र लिखकर श्रीजगन्नाथ संस्कृति से जुड़ी पारंपरिक तिथियों और अनुष्ठानों का पालन करने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि स्नान यात्रा और रथयात्रा का आयोजन निर्धारित तिथियों से बाहर नहीं होना चाहिए।
मायापुर स्थित इस्कॉन मुख्यालय और संगठन के अध्यक्ष मधुसेविता दास प्रभु को भेजे पत्र में गजपति महाराज ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की परंपराओं की पवित्रता बनाए रखना उनकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने आग्रह किया कि स्नान यात्रा केवल ज्येष्ठ पूर्णिमा और रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वाली पारंपरिक नौ दिवसीय अवधि के भीतर ही आयोजित की जाए।
इस्कॉन का पुरी से अलग प्लान
गजपति महाराज ने अपने पत्र में वर्ष 2025 में इस्कॉन द्वारा दिए गए उस आश्वासन का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि विश्वभर में स्नान यात्रा ज्येष्ठ पूर्णिमा को और भारत में रथयात्रा निर्धारित नौ दिनों के भीतर ही आयोजित की जाएगी। हालांकि उन्होंने चिंता जताई कि इसके बावजूद पिछले वर्ष कई अंतरराष्ट्रीय केंद्रों में निर्धारित तिथि से अलग स्नान यात्रा आयोजित की गई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि जानकारी मिली है कि इस्कॉन का उज्जैन केंद्र इस वर्ष 16 से 25 जुलाई के बीच मध्य प्रदेश के 66 स्थानों पर रथयात्रा निकालने की योजना बना रहा है, जबकि पुरी की 9 दिवसीय रथयात्रा 24 जुलाई को समाप्त हो जाएगी। ऐसे में 25 जुलाई को होने वाला आयोजन परंपरागत अवधि से बाहर माना जाएगा।
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इस्कॉन का कदम शास्त्रों के अनुसार नहीं
गजपति महाराज ने स्कंद पुराण सहित विभिन्न धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि स्वयं भगवान जगन्नाथ ने ज्येष्ठ पूर्णिमा को स्नान यात्रा और आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को रथयात्रा मनाने का विधान निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन से जुड़े विद्वान भी कई बार इस विषय में इस्कॉन को अवगत करा चुके हैं।
पत्र में उन्होंने कहा कि जगन्नाथ परंपरा से जुड़ी निर्धारित तिथियों की अनदेखी दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करती है। इसलिए इस्कॉन को अपने पूर्व निर्णयों पर पुनर्विचार कर शास्त्रसम्मत परंपराओं का पालन करना चाहिए।
इस बीच जगन्नाथ संस्कृति के प्रख्यात शोधकर्ता नरेश दास ने कहा कि रथयात्रा का आयोजन नौ दिवसीय अवधि के भीतर किसी भी दिन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किया जा सकता है, लेकिन निर्धारित अवधि के बाहर आयोजन उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की परंपराओं और संस्कृति का सम्मान सभी को करना चाहिए।