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    पुरी अपडेट: जगन्नाथ मंदिर में बदले गए चांदी के 'रत्न पलंक', आज विशेष नीति के कारण दर्शन का समय बदला

    Updated: Wed, 15 Apr 2026 07:19 PM (IST)

    विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर बुधवार, 15 अप्रैल को शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगा। यह अस्थायी रोक देवताओं की विशेष 'बनकला ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    HighLights

    1. देवताओं की गोपनीय 'बनकलागी नीति' संपन्न की जाएगी।

    2. चांदी के नए रत्न पलंक स्थापित, पुराने संग्रहालय भेजे।

    संसू, पुरी। विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के कपाट बुधवार, 15 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए चार घंटे के लिए बंद रहेंगे। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के अनुसार, मंदिर में देवताओं की विशेष ‘बनकलागी नीति’ संपन्न की जानी है, जिसके कारण शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक आम दर्शन पर अस्थायी रोक रहेगी।
     

    क्या है ‘बनकलागी’ और ‘श्रीमुख श्रृंगार’? 

    बनकलागी भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का एक अत्यंत गोपनीय और पवित्र अनुष्ठान है। इसे ‘श्रीमुख श्रृंगार’ के नाम से भी जाना जाता है। इस अनुष्ठान के दौरान ‘दत्ता महापात्र’ नामक विशेष सेवायत वर्ग भगवान की प्रतिमाओं का नैसर्गिक सौंदर्य निखारते हैं। 

    इस प्रक्रिया में पूरी तरह से प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। कस्तूरी, कपूर, केसर और शंख जैसे हर्बल पदार्थों से तैयार लेप को देवताओं के श्रीमुख पर लगाया जाता है। 
     

    मंदिर में लोगों का प्रवेश वर्जित रहता है  

    चूंकि यह एक अत्यंत गोपनीय सेवा है, इसलिए इस दौरान मंदिर के भीतर बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित रहता है। इससे पहले, ओड़िया नववर्ष के पावन अवसर पर मंगलवार रात एक और महत्वपूर्ण परंपरा निभाई गई। देवताओं के उपयोग में आने वाले ‘रत्न पलंक’ (आभूषणयुक्त शय्या) को नए पलंक से बदल दिया गया है। 

    SJTA के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बताया क‍ि नए पलंक बर्मा टीक की उच्च गुणवत्ता वाली लकड़ी से तैयार किए गए हैं, जिन पर चांदी की बारीक नक्काशी वाली परत चढ़ाई गई है। वहीं, पुराने रत्न पलंकों को सुरक्षित रखने के लिए नीलाद्रि संग्रहालय (Niladri Museum) भेज दिया गया है।

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बुधवार को द्वितीय भोग मंडप की रस्म समाप्त होने के तुरंत बाद शाम 6 बजे से मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाएंगे। रात 10 बजे अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद श्रद्धालु पुनः दर्शन कर सकेंगे। सामान्यतः मंदिर आधी रात तक खुला रहता है, लेकिन इस विशेष अनुष्ठान के चलते समय सारणी में बदलाव किया गया है।