पुरी जगन्नाथ मंदिर में रत्नभंडार की गिनती का काम तेज, 80 से ज्यादा आभूषणों का हुआ मिलान
पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्नभंडार में आभूषणों की गिनती तेजी से जारी है। गुरुवार को 1978 की सूची के आधार पर 80 से अधिक आभूषणों का सफलतापूर्वक मिलान किया ...और पढ़ें
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पुरी जगन्नाथ मंदिर में रत्न भंडार की गिनती शुरू। (जागरण)
HighLights
80 से अधिक आभूषणों का 1978 सूची से मिलान हुआ।
7 घंटे तक चली गिनती प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं।
1978 के बाद पहली बार हो रही है विस्तृत गिनती।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। पुरी जगन्नाथ मंदिर के भीतर स्थित रत्नभंडार में आभूषणों की गिनती का कार्य लगातार गति पकड़ रहा है।
गुरुवार को 80 से अधिक रत्न आभूषणों का सफलतापूर्वक मिलान किया गया। यह मिलान वर्ष 1978 की सूची के आधार पर किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बनी हुई है।
गिनती शुरू होने से पहले एक विशेष घटना ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। दोपहर धूप के दौरान भगवान बलभद्र की अधरमाला अचानक गिर गई, जिसे सेवायतों और गिनती टीम ने शुभ संकेत माना। इसके बाद महाप्रभु का आशीर्वाद लेकर टीम ने भीतर रत्नभंडार में प्रवेश कर कार्य शुरू किया।
7 घंटे तक चला गिनती अभियान
जानकारी के अनुसार, दोपहर 12:25 बजे रत्नभंडार का ताला खोला गया और गिनती का कार्य प्रारंभ हुआ, जो शाम 7:15 बजे तक चला।
करीब सात घंटे तक चली इस प्रक्रिया में एक-एक आभूषण का बारीकी से मिलान किया गया। 1978 की सूची में क्रम संख्या स्पष्ट होने के कारण गिनती में सहूलियत मिल रही है, हालांकि प्रक्रिया बेहद जटिल और समयसाध्य है।
तीसरे चरण में पहुंचा कार्य, नहीं मिली कोई गड़बड़ी
13 अप्रैल से शुरू हुआ भीतर रत्नभंडार का तीसरा चरण अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है। अब तक की गिनती में किसी प्रकार की गड़बड़ी या विसंगति सामने नहीं आई है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया सटीकता और पारदर्शिता के साथ की जा रही है।
1978 के बाद पहली बार हो रही गिनती
गौरतलब है कि 1978 के बाद पहली बार भीतर रत्नभंडार के आभूषणों की गिनती की जा रही है। इस बार गिनती के साथ-साथ आभूषणों का वजन, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और 3डी स्कैनिंग भी की जा रही है, ताकि भविष्य के लिए सटीक रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।
चंदन यात्रा के दौरान रुकेगा काम
मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बताया कि चंदन यात्रा के दौरान गिनती का कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया जाएगा। पूरी प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। फिलहाल यह बताना संभव नहीं है कि कुल कार्य का कितना हिस्सा पूरा हो चुका है।