Puri Rath Yatra: रथयात्रा में होटलों की मनमानी से श्रद्धालु बेहाल, फुटपाथ और समुद्र तट पर कट रही रात
जगन्नाथ रथयात्रा में होटलों द्वारा मनमाना किराया वसूलने से श्रद्धालु परेशान हैं, जिससे उन्हें फुटपाथ और समुद्र तट पर रात बितानी पड़ रही है। बारिश और प ...और पढ़ें

HighLights
होटलों ने रथयात्रा में 3-4 गुना किराया बढ़ाया, न्यूनतम बुकिंग अनिवार्य।
श्रद्धालु फुटपाथ, बड़दांड और समुद्र तट पर रात बिताने को मजबूर।
रेलवे ने 30 हजार यात्रियों के लिए अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की।
शेषनाथ राय, पुरी। विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा में इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब पुरी पहुंचा है। महाप्रभु के दर्शन की आस लेकर देश-विदेश से आए भक्तों को जहां आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति हो रही है, वहीं दूसरी ओर आवास और परिवहन व्यवस्था की कमी ने गरीब एवं मध्यम वर्गीय श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई श्रद्धालुओं ने होटल संचालकों पर मनमाने किराए वसूलने का आरोप लगाया है।
चार गुना तक बढ़ा होटल किराया
श्रद्धालुओं का कहना है कि रथयात्रा के दौरान कई होटलों ने सामान्य दिनों की तुलना में तीन से चार गुना तक किराया बढ़ा दिया है। अधिकांश होटलों में न्यूनतम तीन दिनों की बुकिंग अनिवार्य कर दी गई है।
छोटे होटलों में भी 18 हजार रुपये से लेकर 30-40 हजार रुपये तक किराया मांगा जा रहा है। ऐसे में सीमित बजट वाले श्रद्धालु होटल लेने में असमर्थ हैं और उन्हें फुटपाथ, बड़दांड तथा समुद्र तट पर रात गुजारनी पड़ रही है।

बारिश ने बढ़ाई परेशानी
रथयात्रा से पहले और उसके बाद लगातार हो रही बारिश ने श्रद्धालुओं की कठिनाइयों को और बढ़ा दिया है। खुले आसमान के नीचे ठहरे लोगों को बारिश से बचने के लिए प्लास्टिक शीट और अस्थायी इंतजामों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई परिवार छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ सड़क किनारे रात बिताने को मजबूर दिखाई दिए।
खबरें और भी
धर्मशालाओं की कमी बनी बड़ी समस्या
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले पुरी में गरीब और मध्यम वर्गीय यात्रियों के लिए कई सस्ती धर्मशालाएं उपलब्ध थीं। समय के साथ इनमें से कुछ भवनों का उपयोग सरकारी कार्यालयों और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए होने लगा, जिससे आम श्रद्धालुओं के लिए सस्ते आवास के विकल्प सीमित हो गए हैं।

वीआईपी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
रथयात्रा के दौरान वीआईपी और विशिष्ट अतिथियों के लिए विशेष टेंट, बैठने और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं का कहना है कि आम भक्तों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। रथयात्रा जैसे जनआस्था के पर्व में वीआईपी संस्कृति को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
घर लौटने में भी हो रही दिक्कत
गुंडिचा मंदिर की ओर रथ पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने वापसी की कोशिश की, लेकिन पर्याप्त ट्रेन और बस सेवाएं उपलब्ध नहीं होने से हजारों लोग पुरी में ही फंस गए। देर रात तक बड़ी संख्या में यात्री बड़दांड और आसपास के क्षेत्रों में ठहरे रहे।

रेलवे की पहल से मिली राहत
यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने पुरी स्टेशन परिसर में अस्थायी ठहराव की व्यवस्था की है। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष करीब 30 हजार यात्रियों के ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को राहत मिली है।
कार्रवाई की मांग
श्रद्धालुओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन से होटलों की मनमानी पर अंकुश लगाने, सस्ती आवास व्यवस्था बढ़ाने तथा रथयात्रा के दौरान गरीब और मध्यम वर्गीय यात्रियों के लिए विशेष राहत केंद्र स्थापित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो पुरी आने वाले श्रद्धालुओं का अनुभव प्रभावित हो सकता है।