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    ओडिशा के राउरकेला में 50 बस्तियों की एक लाख आबादी के पास न स्थायी पता, न सरकारी योजनाओं का लाभ

    Updated: Tue, 28 Apr 2026 01:55 AM (IST)

    ओडिशा के राउरकेला में लगभग एक लाख लोग 50 से अधिक बस्तियों में बिना स्थायी पते और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। ...और पढ़ें

    50 बस्तियों की एक लाख आबादी के पास न स्थायी पता

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    जागरण संवाददाता, राउरकेला। स्मार्ट सिटी राउरकेला के बाहरी इलाकों और बस्तियों में रहने वाले करीब एक लाख लोग आज भी अपने स्थायी पते के लिए तरस रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि 50 से अधिक छोटी-बड़ी बस्तियां न तो राउरकेला नगर निगम (आरएमसी) के अधीन आती हैं और न ही लाठीकाटा ब्लॉक की किसी पंचायत के अंतर्गत। 

    इस प्रशासनिक उदासीनता और त्रिशंकु स्थिति के कारण इन क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी आबादी तक सरकारी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत नहीं पहुंच पा रहा है और विकास के दावे यहां पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं।

    19 बस्तियों में निवास करते हैं लगभग 22 हजार लोग

    शहर के बीचों-बीच स्थित हमीरपुर राउरकेला की सबसे पुरानी मानव बस्तियों में से एक है, जिसका इतिहास इस्पात कारखाने से भी पुराना है। 1950 के दशक में इस्पात कारखाने की स्थापना से पूर्व यह एक घना जंगल और आदिवासी गांव हुआ करता था। वर्तमान में यहां 19 बस्तियों में लगभग 22 हजार लोग निवास करते हैं। 

    विडंबना यह है कि इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद हमीरपुर सीधे तौर पर किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं उठा पा रहा है। पूर्व में यह क्षेत्र एनएसी (एसटी) के अंतर्गत आता था, लेकिन 1994 में इसे समाप्त कर दिया गया। 

    इसके बाद दिसंबर 1994 में राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) ने राज्य सरकार के साथ समझौते के तहत इस क्षेत्र को अपने अधीन तो लिया, लेकिन मात्र चार वर्ष बाद यानी 1998 में आरएसपी ने हमीरपुर को उसके हाल पर छोड़ दिया। तब से लेकर आज तक यह क्षेत्र घोर उपेक्षा का शिकार है। यहां न तो स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था है और न ही पेयजल आपूर्ति सुचारू है।

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    सड़कें मरम्मत के अभाव में बदहाल स्थिति में

    आरएसपी की सीएसआर योजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य तो हो रहे हैं, लेकिन हमीरपुर को इस विकास प्रक्रिया से पूरी तरह अछूता रखा गया है। प्रशासन की अनदेखी का आलम यह है कि वर्ष 2010 में आरएमसी द्वारा यहां स्थापित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को भी 2013 में सेक्टर-19 जगन्नाथपाली में स्थानांतरित कर दिया गया। 1994 में बनाई गई सड़कें आज मरम्मत के अभाव में बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी हैं।

    लिस्ट में दर्जनों बस्तियां शामिल

    हमीरपुर जैसी ही दयनीय स्थिति आरएमसी कार्यालय से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित अन्य दर्जनों बस्तियों की भी है। इनमें शीतलपड़ा सहित तरकेरा, तुमकेला, लुआकेरा, टाटा बस्ती, टांगरपाली बस्ती, पात्र बस्ती, समरा बस्ती, झारमुंडा, मुंडा बस्ती, चिरुगढ़, मटियाडेरा, धरमडीह, रेंगाली, बुरुड़ी, बाहागढ़, लालटांकी, बंधाबसा, ऑटो कॉलोनी, कंस्ट्रक्शन कॉलोनी, शांधीनगर, गंजू मार्केट, करुथा बस्ती, पुराना नंद मार्केट, लेंगड़ा बस्ती, ब्रिटानिया कॉलोनी, नारायण मार्केट और आनंद बाजार जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं। 

    यह सभी इलाके न तो निगम के अधीन हैं और न ही पंचायत के। हालांकि, आरएमसी की ओर से इन क्षेत्रों में कुछ बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन विशाल आबादी और उनकी मूलभूत जरूरतों को देखते हुए यह ऊंट के मुंह में जीरा के समान ही साबित हो रही हैं।