माओवादी सरेंडर या ओडिशा पुलिस की साजिश? 19 साल की मोंगड़ी के आत्मसमर्पण पर उठा विवाद
राउरकेला में 19 वर्षीय मोंगड़ी होनहागा के आत्मसमर्पण पर विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस इसे माओवाद के खिलाफ सफलता मान रही है, जबकि परिजनों का आरोप है कि उ ...और पढ़ें

मोंगड़ी होनहागा

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जागरण संवाददाता, राउरकेला। राउरकेला में एक 19 वर्षीय युवती के आत्मसमर्पण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 30 मार्च को पुलिस के सामने सरेंडर करने वाली मोंगड़ी होनहागा को लेकर पुलिस और उसके परिजनों के दावे एक-दूसरे के विपरीत नजर आ रहे हैं। जहां पुलिस इसे माओवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता मान रही है।
वहीं परिजनों ने पुलिस पर उनकी बेटी को जबरन माओवादी साबित करने का गंभीर आरोप मढ़ा है। मोंगड़ के पिता मंगल होनहागा ने पुलिस के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनकी बेटी का किसी भी प्रतिबंधित संगठन से कोई लेना-देना नहीं है।
परिजनों का आरोप है कि मोंगड़ी को झूठे मामले में फंसाया गया है और उसे माओवादी बताकर आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया गया है। पिता के इस बयान के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
एसपी ने आरोपों को सिरे से दरकिनार किया
हालांकि, राउरकेला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने इन आरोपों को सिरे से दरकिनार कर दिया है। एसपी ने स्पष्ट रूप से कहा कि मोंगड़ी के माओवादी गतिविधियों में शामिल होने के पुलिस के पास पर्याप्त और ठोस सबूत मौजूद हैं।
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उन्होंने जानकारी दी कि झारखंड और ओडिशा पुलिस की संयुक्त जांच में युवती की संलिप्तता की पुष्टि हुई थी। जिसके बाद ही यह प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस के अनुसार, उस दिन मोंगड़ी के साथ कुछ अन्य माओवादियों ने भी आत्मसमर्पण किया था, जो पुलिस की जांच को और पुख्ता करता है।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बना मामला
इस विवादित प्रकरण के बीच राउरकेला पुलिस ने मोंगड़ी होनहागा का एक वीडियो संदेश भी सार्वजनिक किया है। इस वीडियो के जरिए पुलिस प्रशासन यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि युवती ने अपनी मर्जी से और अपनी गतिविधियों को स्वीकार करते हुए आत्मसमर्पण किया है। फिलहाल, परिजनों के विरोध और पुलिस की दलीलों के बीच यह मामला पूरी तरह गरमाया हुआ है और क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।