ओडिशा के भद्रक में टूटा तटबंध: 20 गांव जलमग्न, 15 हजार लोग प्रभावित; राहत व्यवस्था पर उठे सवाल
सालंदी नदी का तटबंध टूटने से भद्रक जिले के 20 गांव जलमग्न हो गए, जिससे 15 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। राहत सामग्री की कमी, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य से ...और पढ़ें

जलमग्न ग्रामीण क्षेत्र
HighLights
सालंदी तटबंध टूटने से भद्रक के 20 गांव जलमग्न हुए।
15 हजार लोग प्रभावित, राहत सामग्री की कमी से जूझ रहे।
तटबंध निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। भद्रक जिले में सालंदी नदी के तटबंध टूटने से अर्ण्णपाल पंचायत समेत आसपास के कई गांवों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। आधी रात को मलिकसाही के पास तटबंध टूटने के बाद देखते ही देखते बाढ़ का पानी खेतों और घरों में घुस गया। सुबह लोगों की आंख खुली तो चारों ओर पानी ही पानी नजर आया। बाढ़ से करीब 20 गांव प्रभावित हुए हैं और लगभग 15 हजार लोगों पर इसका असर पड़ा है।
भद्रक विधानसभा क्षेत्र की अर्ण्णपाल पंचायत के अलावा बिलणा, बोडक, बारुआ और तालगोपबिंधा समेत पांच पंचायतों के बड़े हिस्से में पानी भर गया है। कई संपर्क मार्ग बह जाने से ग्रामीणों का बाहरी दुनिया से संपर्क कट गया। हजारों लोग अब भी जलभराव के बीच फंसे हुए हैं।
बाढ़ का पानी कच्चे और छप्पर वाले घरों में घुसने के बाद लोग जान बचाने के लिए स्कूल भवनों और भगवत टुंगी में शरण लेने को मजबूर हैं। राहत शिविरों में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि राहत सामग्री पर्याप्त नहीं है। दवाइयों और स्वच्छ पेयजल की कमी से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि चारों ओर पानी भरे रहने से सांपों का खतरा भी बढ़ गया है। रात के समय लोग भय के साये में जीवन बिता रहे हैं। बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।
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राहत में कमी का आरोप
अर्ण्णपाल पंचायत के भक्ती ब्रह्मपुर गांव निवासी रमाकांत नायक ने बताया कि बाढ़ के शुरुआती दिनों में पर्याप्त सूखा राशन नहीं मिला। पका हुआ भोजन भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके घर में अब भी पानी भरा हुआ है, चूल्हा डूब चुका है और खेती-बाड़ी पूरी तरह बर्बाद हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र के अधिकांश नलकूप जलमग्न होने से स्वच्छ पेयजल का संकट गहरा गया है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल पेयजल और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
तटबंध निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हाल ही में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए सालंदी नदी के तटबंध की गुणवत्ता खराब थी, जिसके कारण वह बाढ़ का दबाव नहीं झेल सका। तटबंध टूटने से बड़े इलाके में पानी फैल गया और हजारों लोगों को नुकसान उठाना पड़ा।
सात दिन और राहत देने की मांग
बाढ़ प्रभावित लोगों ने प्रशासन से कम से कम सात दिनों तक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने की मांग की है। शुशुआ, रजुआलिबिंधा, लेंजरा और तालगोपबिंधा समेत कई गांवों के ग्रामीणों ने भी राहत अवधि बढ़ाने तथा स्वास्थ्य एवं पेयजल सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की है।
बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे उतर रहा हो, लेकिन प्रभावित परिवारों के सामने अब भी राहत, पुनर्वास और आजीविका बहाली की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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