दुनिया में और कहीं नहीं मिलते भारत के ये 6 दुर्लभ पक्षी, गारंटी है इनकी खूबसूरती मोह लेगी आपका मन

Updated: 2026-08-05, 14:50 IST

आज हम आपको भारत के 6 ऐसे दुर्लभ पक्षियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका रंग और बनावट इतनी मनमोहक है कि इन्हें देखकर आप भी प्रकृति की कारीगरी के दीवाने हो जाएंगे।

मालाबार ट्रोगोन1/6

मालाबार ट्रोगोन

अगर आप कभी दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट के घने जंगलों में जाएं, तो आपको यह खूबसूरत पक्षी देखने को मिल सकता है। बता दें, नर मालाबार ट्रोगोन बहुत ही आकर्षक होते हैं। इनके सीने और पेट का रंग गहरा लाल या गुलाबी होता है, जो हरे-भरे जंगल में एकदम अलग चमकता है। यह पक्षी बहुत शांत स्वभाव का होता है और अक्सर पेड़ों की डालियों पर चुपचाप बैठा रहता है।

नारकोंडम हॉर्नबिल 2/6

नारकोंडम हॉर्नबिल

यह पक्षी दुनिया में सिर्फ और सिर्फ भारत के एक छोटे से द्वीप 'नारकोंडम' पर पाया जाता है। इसकी चोंच बहुत बड़ी और खास बनावट वाली होती है। इसके शरीर के रंग मुख्य रूप से काले, सफेद और भूरे होते हैं। यह पक्षी मुख्य रूप से अंजीर के फल खाना पसंद करता है। क्योंकि यह सिर्फ एक ही छोटे से द्वीप पर रहता है, इसलिए यह बहुत दुर्लभ है।

बुगुन लियोसिचला 3/6

बुगुन लियोसिचला

इस छोटे और रंग-बिरंगे पक्षी को साल 2006 में अरुणाचल प्रदेश के 'ईगलनेस्ट वाइल्डलाइफ सेंचुरी' में खोजा गया था। इसका नाम वहां रहने वाली 'बुगुन' नाम की जनजाति के नाम पर रखा गया है। इसके पंखों पर पीला, लाल, काला और जैतून के रंग का इतना सुंदर मिश्रण होता है कि इसे देखते ही रहने का मन करता है। यह दुनिया के सबसे दुर्लभ पक्षियों में से एक माना जाता है।

नीलगिरि फ्लाईकैचर 4/6

नीलगिरि फ्लाईकैचर

दक्षिण भारत की नीलगिरि पहाड़ियों की ठंडक में रहने वाला यह एक बहुत ही प्यारा और छोटा पक्षी है। इसके शरीर का रंग गहरा चमकीला नीला होता है, जो आंखों को बहुत सुकून देता है। यह पक्षी हवा में उड़ते हुए ही छोटे-छोटे कीड़ों को अपना शिकार बना लेता है, इसलिए इसे 'फ्लाईकैचर' कहा जाता है।

जेर्डन कोर्सर 5/6

जेर्डन कोर्सर

यह पक्षी आंध्र प्रदेश के कुछ खास झाड़ीदार जंगलों में पाया जाता है और बहुत ही रहस्यमयी है। इसे 1900 की शुरुआत में विलुप्त मान लिया गया था, लेकिन 86 साल बाद 1986 में यह अचानक फिर से दिखाई दिया। इसकी चोंच पीली होती है और छाती पर भूरे और सफेद रंग की धारियां होती हैं। यह रात के समय ज्यादा एक्टिव रहता है, इसलिए इसे देख पाना बहुत मुश्किल होता है।

फॉरेस्ट ओवलेट 6/6

फॉरेस्ट ओवलेट

मध्य भारत के जंगलों में पाया जाने वाला यह छोटा सा उल्लू देखने में बहुत ही क्यूट लगता है। जेर्डन कोर्सर की तरह ही, इसे भी विलुप्त मान लिया गया था और यह पूरे 113 साल बाद 1997 में दोबारा खोजा गया। बाकी उल्लुओं से अलग, यह दिन के समय भी शिकार करना पसंद करता है।