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    'SIR में 63 प्रतिशत हिंदू नाम हटे', टीएमसी के दावों पर भाजपा ने उठाए सवाल

    Updated: Fri, 10 Apr 2026 06:50 AM (IST)

    तृणमूल के आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में हटाए गए 58 लाख नामों में 44 लाख हिंदू थे, जबकि मुस्लिम नामों की संख्या करीब 13.5 लाख थी। दूसरे चरण में कटे 5 ...और पढ़ें

    'SIR में 63 प्रतिशत हिंदू नाम हटे', टीएमसी के दावों पर भाजपा ने उठाए सवाल (फोटो- एक्स)

    'SIR में 63 प्रतिशत हिंदू नाम हटे', टीएमसी के दावों पर भाजपा ने उठाए सवाल (फोटो- एक्स)

    HighLights

    1. भाजपा ने पूछा, यह आंकड़े कहां से आए, इसकी सत्यता क्या है?

    2. चुनाव आयोग ने नामों का धार्मिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया है

    राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआइआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख नाम हटा दिए गए हैं।

    चुनाव आयोग ने इन नामों का धार्मिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर गणना कर दावा किया है कि हटाए गए नामों में 63 प्रतिशत हिंदू हैं। तृणमूल के इस दावे ने भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है।

    तृणमूल के आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में हटाए गए 58 लाख नामों में 44 लाख हिंदू थे, जबकि मुस्लिम नामों की संख्या करीब 13.5 लाख थी।

    दूसरे चरण में कटे 5.5 लाख नामों में से 5.28 लाख हिंदू नाम थे। तीसरे चरण में हटाए गए 27 लाख नामों में मुस्लिम समुदाय की संख्या अधिक (17.5 लाख) रही। कुल मिलाकर, हिंदू-मुस्लिम नामों के कटने का अनुपात 2:1 का है।

    तृणमूल प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को खोजने के नाम पर भाजपा ने सभी को लाइन में खड़ा कर दिया, जिससे गरीब हिंदू भी प्रताड़ित हुए।

    दूसरी ओर, भाजपा प्रवक्ता राजर्षि लाहिड़ी ने आंकड़ों की सत्यता पर सवाल ही नहीं उठाया, बल्कि पूछा कि तृणमूल के पास यह गोपनीय डाटा आया कहां से? उन्होंने आशंका जताई कि टीएमसी समर्थक बीएलओ ने यह जानकारी लीक की है। जानकारों का मानना है कि मतुआ बहुल क्षेत्रों में बड़ी संख्या में हिंदू नाम हटने से आगामी चुनावों में भाजपा के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है।

    ट्रिब्यूनल की कतार में खड़े बुजुर्ग की मौत का आरोप

    बंगाल के नदिया जिले में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की जद्दोजहद एक बुजुर्ग के लिए कथित रूप से जानलेवा साबित हुई।

    राणाघाट एसडीओ कार्यालय के बाहर ट्रिब्यूनल में आवेदन करने के लिए घंटों कतार में खड़े 68 वर्षीय जीवनकृष्ण विश्वास की अचानक गिरकर मौत हो गई। स्वजन ने इस घटना के लिए एसआइआर की दहशत और प्रशासनिक कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है।

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