अगले साल यूपी-पंजाब में विधानसभा चुनाव, प्रियंका गांधी को कोई नई जिम्मेदारी मिलेगी? कांग्रेस में होगा फेरबदल
डी.के. शिवकुमार को कर्नाटक का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किए जाने के बाद, कांग्रेस आलाकमान ने बी.के. हरिप्रसाद को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी ...और पढ़ें

आगामी चुनावों में क्या प्रियंका गांधी को कोई नई जिम्मेदारी मिलेगी (फाइल फोटो)
HighLights
उत्तर प्रदेश में दलित नेतृत्व की तलाश में कांग्रेस
पिछले ढाई साल से प्रियंका गांधी के पास कोई सीधा संगठनात्मक पद नहीं है
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। डी.के. शिवकुमार को कर्नाटक का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किए जाने के बाद, कांग्रेस आलाकमान ने बी.के. हरिप्रसाद को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है।
इसी के साथ अब कांग्रेस संगठन में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर एक बड़े देशव्यापी फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है। यह वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यकाल का आखिरी बड़ा फेरबदल माना जा रहा है।
चुनाव वाले राज्यों पर फोकस
कांग्रेस का मुख्य ध्यान उन राज्यों पर है जहां अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जैसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर।
पंजाब में बदलाव की सुगबुगाहट
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह बरार और विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा दोनों एक ही जाति (जट सिख) से हैं। इसलिए जातिगत समीकरण साधने के लिए विजय इंदर सिंगला (हिंदू चेहरा) या पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (दलित चेहरा) को कमान सौंपी जा सकती है।
उत्तर प्रदेश में दलित नेतृत्व की तलाश
यूपी में वर्तमान प्रभारी अविनाश पांडे, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और आराधना मिश्रा तीनों उच्च जाति से आते हैं। दलित मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए किसी दलित नेता को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
केरल और महाराष्ट्र में नए चेहरे
केरल के प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ और महाराष्ट्र के कांग्रेस प्रभारी रमेश चेन्निथला को केरल सरकार में मंत्री बनाया गया है, जिससे इन पदों पर नए बदलाव तय हैं।
दिग्गजों की भूमिका
राजस्थान के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा बदले जा सकते हैं, जबकि सचिन पायलट को छत्तीसगढ़ की जगह किसी बड़े राज्य का प्रभार दिया जा सकता है।
प्रियंका गांधी और के.सी. वेणुगोपाल पर नजरें
के.सी. वेणुगोपाल: पिछले 7 वर्षों से संगठन महासचिव पद पर बने हुए हैं। केरल का मुख्यमंत्री न बनाए जाने के बावजूद, विधायकों के समर्थन के कारण उनकी स्थिति मजबूत बनी हुई है।
प्रियंका गांधी: पिछले ढाई साल से प्रियंका गांधी के पास कोई सीधा संगठनात्मक पद नहीं है। इस आगामी फेरबदल में उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलती है या नहीं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।