यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 27, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मुश्किल में सिद्दरमैया परिवार, CM की पत्नी को ED का समन; MUDA Scam से जुड़ा है मामला
MUDA Case प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सिद्दरमैया की पत्नी पार्वती बी एम को मंगलवार को अधिकारियों के सामने पेश होने का समन भेजा है। प्रवर्तन निदेशालय के ...और पढ़ें

HighLights
- सिद्दरमैया की पत्नी पार्वती बी एम सबूत और रिकॉर्ड जमा करने होंगे: ईडी
- मैसूर के एक पॉश इलाके में सीएम की पत्नी को आवंटित किया गया था फ्लैट
पीटीआई, बेंगलुरु। MUDA Case। कर्नाटक मूडा मामले में मुख्यमंत्री सिद्दरमैया (Siddaramaiah) के परिवार की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सिद्दरमैया की पत्नी पार्वती बी एम को मंगलवार को अधिकारियों के सामने पेश होने का समन भेजा है। प्रवर्तन निदेशालय के अतिरिक्त निदेशक, मुरलीकन्नन ने उन्हें सबूत और रिकॉर्ड जमा करने के लिए लिखा है।
सीएम की पत्नी को सबूत देने होंगे: ईडी
मुरलीक्कन्नन ने कहा कि वह धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत मामले की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह पीएमएलए के तहत जांच या कार्यवाही के संबंध में सबूत देने और रिकॉर्ड पेश करने के लिए पार्वती की उपस्थिति को आवश्यक मानते हैं।
क्या है आरोप?
सीएम सिद्दरमैया की पत्नी बीएम पार्वती को 14 साइटों के हस्तांतरण में कई अनियमितताओं के सबूत मिले हैं। ईडी का दावा है कि मुडा ने बेनामी और इसी तरह के अन्य लेनदेन में कुल 1,095 साइटों को अवैध रूप से आवंटित किया था।
आरोप लगाया गया है कि सिद्दरमैया की पत्नी को मैसूर के एक पॉश इलाके में प्रतिपूरक साइटें आवंटित की गईं, जिनकी संपत्ति का मूल्य उनकी भूमि के स्थान की तुलना में अधिक था, जिसे मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहीत किया गया था।
MUDA ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ भूमि के बदले 50:50 अनुपात योजना के तहत भूखंड आवंटित किए थे, जहां इसने एक आवासीय लेआउट विकसित किया था। 3.16 एकड़ जमीन पर पार्वती का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। इस मामले की जांच लोकायुक्त के साथ-साथ ईडी भी कर रही है।
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राज्य सरकार ने MUDA साइटों का आवंटन रद किया
कर्नाटक सरकार ने 48 MUDA (मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण) साइटों का आवंटन रद्द कर दिया है, जो 23 मार्च, 2023 को एक प्रस्ताव के तहत आवंटित की गई थीं। ये साइटें मैसूर शहर के दत्तागल्ली इलाके में स्थित थीं। शहरी विकास विभाग के आदेश के बाद 30 नवंबर, 2024 को इन साइटों का आवंटन रद्द कर दिया गया।