आखिरकार मान गए नीतीश... राजनीति में कदम रखेंगे बेटे निशांत, कब होगी घोषणा?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने की संभावना है। जल्द ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि वे राज्यसभा या बिहार की सक्रिय सिय ...और पढ़ें

जून में बिहार विधान परिषद की नौ सीटें खाली हो रही हैं

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। बिहार की राजनीति नए अध्याय की दहलीज पर खड़ी दिख रही है। लंबे समय से जारी अटकलों और प्रतीक्षा के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने की संभावना अब वास्तविक रूप लेती नजर आ रही है। एक-दो दिनों में स्पष्ट हो सकता है कि उनका राजनीतिक सफर किस रास्ते से शुरू होगा।
राज्यसभा के जरिए या सीधे बिहार की सक्रिय सियासत में उतरकर। बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें रिक्त हुई हैं और निर्वाचन प्रक्रिया जारी है। जनता दल (यू) के हिस्से में दो सीटें हैं। एक सीट पर कर्पूरी ठाकुर के पुत्र और केंद्रीय राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर का जाना तय माना जा रहा है।
राज्यसभा जा सकते हैं निशांत
दूसरी सीट को लेकर पार्टी में शीर्ष स्तर पर मंथन चल रहा है। इसी संदर्भ में निशांत कुमार का नाम प्रमुखता से उभरा है। यदि उन्हें राज्यसभा भेजने का निर्णय होता है तो उनके राजनीतिक भविष्य की औपचारिक शुरुआत इसी हफ्ते हो सकती है। लेकिन यदि वे राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका चुनते हैं तो घोषणा में कुछ समय लग सकता है।
दरअसल, निशांत के राजनीति में आने की चर्चा नई नहीं है। वर्षों से इसपर कयास लगाए जाते रहे हैं। इसकी मुख्य वजह नीतीश कुमार की राजनीतिक कार्यशैली रही है। उन्होंने हमेशा सुशासन, पारदर्शिता और सिद्धांत आधारित राजनीति को प्राथमिकता दी है। परिवारवाद के विरोध की उनकी स्पष्ट छवि रही है। यही कारण था कि अब तक उन्होंने अपने पुत्र को सक्रिय राजनीति से दूर रखा। परंतु राजनीति परिस्थितियों से संचालित होती है।
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विधान परिषद जाने की भी चर्चा
जदयू के शीर्ष नेताओं को लंबे समय से महसूस होता रहा है कि पार्टी के भविष्य और संगठनात्मक स्थिरता के लिए नया नेतृत्व उभरना चाहिए। पार्टी के एक शीर्ष नेता ने बताया कि निशांत का सार्वजनिक जीवन में आना सकारात्मक कदम होगा। वरिष्ठ नेताओं के आग्रह पर नीतीश कुमार ने सहमति जताई है। निर्णय शीघ्र सामने आ सकता है।
यदि निशांत राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका चुनते हैं तो उनके लिए विधान परिषद का मार्ग खुला है। जून में बिहार विधान परिषद की नौ सीटें खाली हो रही हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें विधान पार्षद बनाया जा सकता है। इससे उन्हें प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। तब तक संगठन में उनके लिए उपयुक्त जिम्मेदारी तय की जा सकती है। राज्यसभा जाने की स्थिति में रहस्य से पर्दा एक-दो दिनों में ही हट जाएगा।
कई नेताओं ने किया समर्थन
पार्टी के भीतर भी कई वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से निशांत के पक्ष में अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी तथा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने कई अवसरों पर कहा है कि कार्यकर्ता चाहते हैं कि निशांत सक्रिय भूमिका निभाएं। जदयू के सहयोगी दलों के नेताओं ने भी समर्थन किया है।
राष्ट्रीय लोकमोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा तथा हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख नेता एवं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी कहा है कि नई पीढ़ी का नेतृत्व सामने आना चाहिए। जदयू संगठनात्मक रूप से भविष्य की तैयारी कर रहा है। यदि निशांत कुमार राजनीति में कदम रखते हैं तो जदयू को दीर्घकालिक स्थिरता मिल सकता है। पिछले दो दशकों से बिहार में नीतीश कुमार का नेतृत्व स्थिरता और विकास का पर्याय बना है। एक मार्च को 75 वर्ष पूरे करने वाले नीतीश आज भी शीर्ष व्यक्तित्व हैं।