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ममता को एक और झटका! TMC में बड़ी टूट की आशंका, 12 सांसदों के BJP में शामिल होने की चर्चा

Published: Tue, 26 May 2026 11:57 AM (IST)Updated: Tue, 26 May 2026 02:07 PM (IST)

चर्चा है कि लोकसभा के 12 से अधिक टीएमसी सांसद भाजपा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, जिससे ममता बनर्जी को बड़ा झटका लग सकता है।

तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी संकट और बढ़ता दिख रहा है (फोटो: पीटीआई)

तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी संकट और बढ़ता दिख रहा है (फोटो: पीटीआई)

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी संकट और बढ़ता दिख रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि लोकसभा में तृणमूल के कई सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और उनमें से एक बड़ा समूह पार्टी छोड़ सकता है।

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में तृणमूल के कुल 29 सांसदों में से करीब 12 सांसद भाजपा में शामिल होने या समर्थन देने की योजना बना चुके हैं। इसके अलावा पांच-छह अन्य सांसदों से भी बातचीत चल रही है।

दल बदल कानून से बचने के लिए 20 सांसदों का समर्थन जरूरी

बताया जा रहा है कि दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए कम से कम 19-20 सांसदों को एक साथ लाने की रणनीति बनाई जा रही है।

राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि तृणमूल नेतृत्व को भी इस संभावित टूट की भनक लग चुकी है और पार्टी को एकजुट रखने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।

चर्चा है कि इनमें पूर्व मुख्यमंत्री व टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनके भतीजे तथा पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कुछ सांसद भी शामिल हैं। भाजपा के लिए यह राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

भाजपा की नजर राज्यसभा में तृणमूल के सांसदों पर भी

लोकसभा में भाजपा के पास अभी 240 सांसद हैं और सरकार सहयोगी दलों के समर्थन से चल रही है। ऐसे में यदि तृणमूल के सांसद बड़ी संख्या में भाजपा के साथ आते हैं तो पार्टी की ताकत और बढ़ जाएगी तथा सहयोगियों पर निर्भरता कम होगी।

सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा के बाद भाजपा की नजर राज्यसभा में तृणमूल के सांसदों पर भी है। तृणमूल के भीतर आइपैक की भूमिका और संगठनात्मक शैली को लेकर असंतोष की भी चर्चा है। हालांकि इन तमाम दावों पर अभी तक किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

शुभेंदु की प्रशासनिक बैठक में तृणमूल सांसद काकोली समेत अन्य विधायक हुए शामिल

बंगाल की राजनीति में मंगलवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा बुलाई गई प्रशासनिक बैठक में शामिल होने पहुंचीं। इस बैठक में तृणमूल के अन्य विधायकों की मौजूदगी ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है।

कल्याणी विश्वविद्यालय के एपीजे अब्दुल कलाम आडिटोरियम में तीन जिलों की प्रशासनिक बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में शामिल होने पहुंचीं काकोली घोष दस्तीदार ने मीडिया से कहा कि प्रशासन सबका होता है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें और तेज हो गईं कि क्या वह जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकती हैं।

हालांकि, उन्होंने इस विषय पर सीधे कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बताया जा रहा है कि देगंगा और स्वरूपनगर के विधायक भी बैठक में मौजूद थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु ने निर्णय लिया था कि प्रशासनिक बैठकों में विपक्षी सांसदों और विधायकों को भी बुलाया जाएगा।

उसी क्रम में तृणमूल जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया था। काकोली घोष दस्तीदार को लेकर पहले से ही दल बदल की चर्चाएं चल रही हैं। विधानसभा चुनाव में तृणमूल की हार के बाद उन्हें लोकसभा के मुख्य सचेतक पद से हटा दिया गया था। बाद में उन्होंने बारासात जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था।

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