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    'जो जाना चाहते हैं, शौक से जाएं', टीएमसी में बगावत के बीच ममता बनर्जी का कार्यकर्ताओं को कड़ा संदेश

    Updated: Tue, 26 May 2026 06:17 AM (IST)

    विधानसभा चुनाव में हार और पार्षदों के इस्तीफों के बाद तृणमूल कांग्रेस में पैदा हुए संकट पर ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जिन्हें ...और पढ़ें

    टीएमसी में बगावत और बिखराव के बीच ममता का कड़ा रुख (फाइल फोटो)

    टीएमसी में बगावत और बिखराव के बीच ममता का कड़ा रुख (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. ममता ने कहा, 'जो जाना चाहते हैं, शौक से जाएं'

    2. पार्टी में एकजुटता और संघर्ष का दिया संदेश

    3. कानूनी सहायता समिति और संगठनात्मक बदलाव किए

    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त व बंगाल के कई नगर निकायों में पार्षदों के इस्तीफे के बाद पैदा हुए संकट के बीच तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सोमवार को कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास पर उत्तर उपनगरीय क्षेत्रों और बिधाननगर नगर निगम के मेयर, चेयरमैन और पार्षदों के साथ एक आपातकालीन बैठक में कड़ा रुख अपनाया।

    उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो लोग पार्टी के अच्छे समय में साथ थे, वे बुरे समय में साथ छोड़ रहे हैं। उन्होंने दो टूक संदेश दिया कि जिन्हें जाना है, वे शौक से जा सकते हैं, लेकिन जो बचे हैं उन्हें एकजुट होकर लड़ना होगा।

    इसी बीच पार्टी ने बड़ा सांगठनिक फेरबदल करते हुए बारसात संगठनात्मक जिले के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाली काकोली घोष दस्तीदार की जगह पूर्व विधायक तापस चटर्जी को कमान सौंप दी है। ममता ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए कानूनी सहायता के लिए मलय घटक और चंद्रिमा भट्टाचार्य के नेतृत्व में पांच सदस्यीय समिति का भी गठन किया है।

    ममता की ‘अदालती जंग’ से दूरी बना रहे तृणमूल के नेता

    बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा से मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रही है। एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव परिणामों को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के कई पराजित नेता इस कानूनी लड़ाई से दूरी बना रहे हैं।

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    ममता बनर्जी ने कई सीटों पर ईवीएम में कारगुजारी और मतगणना केंद्रों पर गड़बड़ी का आरोप लगाया है। तृणमूल सांसद व वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी करीब 50 सीटों पर चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी में हैं। हालांकि कई हारे हुए उम्मीदवार अदालत जाने को तैयार नहीं हैं। जंगीपाड़ा से पराजित पूर्व मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती सहित कई नेताओं ने इस लड़ाई से किनारा कर लिया है।

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