बंगाल में ममता की 'अदालती जंग', TMC में अंतर्कलह और भगदड़ की स्थिति; बिखरती दिख रही तृणमूल
ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव नतीजों को कोर्ट में चुनौती दे रही हैं, लेकिन टीएमसी के कई नेता इस कानूनी लड़ाई से पीछे हट रहे हैं।
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HighLights
ममता बनर्जी चुनाव नतीजों को कोर्ट में चुनौती दे रही हैं।
टीएमसी नेता कानूनी लड़ाई से पीछे हट रहे हैं, नाराजगी बढ़ी।
डायमंड हार्बर में 8 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दिया।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा के हाथों मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) दोहरे संकट से जूझ रही है।
एक तरफ जहां पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी चुनावी नतीजों को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके खुद के नेता इस कानूनी लड़ाई से 'भाग' रहे हैं।
इस प्रशासनिक संकट के बीच, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के गढ़ 'डायमंड हार्बर' में तख्तापलट जैसी स्थिति पैदा हो गई है, जिसने तृणमूल की सांगठनिक रीढ़ को हिलाकर रख दिया है।
कानूनी लड़ाई से पीछे हटते खुद के 'सेनापति'
नतीजों को औपचारिक रूप से स्वीकार न करते हुए ममता बनर्जी ने कम से कम 150 सीटों पर ईवीएम की हेराफेरी और मतगणना केंद्र पर लूट का आरोप लगाया था। पार्टी के वरिष्ठ वकील और सांसद कल्याण बनर्जी इन आरोपों को लेकर करीब 50 सीटों पर 'चुनावी याचिका' (इलेक्शन पिटीशन) दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।
परंतु, टीएमसी नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी कशमकश यह है कि कई पराजित उम्मीदवार खुद इस कानूनी पचड़े में पड़ने से साफ इन्कार कर रहे हैं।
जांगीपाड़ा से हारे पूर्व परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती जैसे कद्दावर नेताओं ने इस अदालती लड़ाई से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। कल्याण बनर्जी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जो नेता 15 साल तक सत्ता की मलाई खाते रहे, वे अब राजनीति छोड़ने का बहाना बनाकर मैदान से भाग रहे हैं।
धराशायी हुआ अभिषेक का 'डायमंड हार्बर मॉडल'
चुनावी हार के जख्म अभी हरे ही थे कि अभिषेक बनर्जी के 'डायमंड हार्बर माडल' पर पार्टी के भीतर से ही आत्मघाती हमला हुआ है।
डायमंड हार्बर नगर पालिका के कुल 16 पार्षदों में से आठ टीएमसी पार्षदों ने भ्रष्टाचार, तानाशाही और पुलिसिया उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। दो अन्य पार्षदों के भी पाला बदलने की अटकलें तेज हैं, जिससे टीएमसी नियंत्रित नगर पालिका बोर्ड का गिरना तय माना जा रहा है।
विद्रोही पार्षदों का सीधा आरोप है कि 'डायमंड हार्बर माडल' के नाम पर इलाके में केवल अराजकता, सिंडिकेट राज और अवैध निर्माणों को बढ़ावा मिला है।
विरोध करने पर पुलिस के जरिए नेताओं को प्रताड़ित किया जाता था। यहां तक कि नगर पालिका के चेयरमैन प्रणब दास ने भी स्थिति पर लाचारी जताते हुए टीएमसी में बने रहने के सवाल पर रहस्यमयी लहजे में कहा, "फिलहाल तृणमूल में हूं।"
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में टीएमसी का संकट
यह दोहरी मार यह साफ दर्शाती है कि तृणमूल कांग्रेस न केवल सत्ता गंवाने के सदमे में है, बल्कि जमीनी स्तर पर उसकी कमान भी ढीली हो रही है।
जहां एक ओर शीर्ष नेतृत्व कानूनी पैंतरेबाज़ी से खुद को सही साबित करने की आखिरी कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर निचले स्तर के नेताओं का पार्टी से मोहभंग और बगावत यह संकेत दे रहे हैं कि बंगाल में तृणमूल की राजनीतिक जमीन तेजी से दरक रही है।
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