भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद खन्ना अकाली दल में शामिल; संगरूर की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद खन्ना अपने समर्थकों सहित शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए। संगरूर में सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया। ...और पढ़ें

संगरूर में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद खन्ना को अकाली दल में शामिल करते हुए शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल।
HighLights
भाजपा उपाध्यक्ष अरविंद खन्ना अकाली दल में हुए शामिल।
सुखबीर बादल ने संगरूर में पार्टी में कराया प्रवेश।
भाजपा को बड़ा झटका, संगरूर में बदले राजनीतिक समीकरण।
जागरण संवाददाता, संगरूर। पंजाब की राजनीति में मंगलवार को उस समय हलचल मच गई जब भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष अरविंद खन्ना ने अपने समर्थकों सहित भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया। संगरूर के एक पैलेस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें सिरोपा पहनाकर पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल कराया।
इस मौके पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान भाजपा के जिला प्रधान धरमिंदर सिंह दुल्लट, तीन पार्षदों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भी अकाली दल में शामिल होने की घोषणा की। इस सामूहिक दल-बदल ने जिले की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह कदम दर्शाता है कि भाजपा के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। वहीं भाजपा के स्थानीय नेताओं का कहना है कि पार्टी संगठन मजबूत है और इससे कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा।
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पार्टी जॉइन करने वाला का होता है पूरा सम्मान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि अकाली दल हमेशा पंजाब और पंजाबियत की आवाज रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी में शामिल होने वाले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं का पूरा सम्मान किया जाएगा। उनका दावा था कि प्रदेश की जनता मौजूदा सरकार और अन्य दलों से निराश है और अकाली दल की नीतियों पर भरोसा जता रही है।
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पंजाब के हितों के लिए खन्ना ने उठाया कदम
अरविंद खन्ना ने कहा कि उन्होंने यह फैसला पंजाब के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया है। उनके अनुसार अकाली दल ही वह मंच है जो किसानों, व्यापारियों और आम लोगों के मुद्दों को मजबूती से उठाता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी मेहनत करेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम से संगरूर जिले में नए समीकरण बन सकते हैं। आने वाले चुनावों के मद्देनजर इसे एक रणनीतिक कदम भी माना जा रहा है।
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