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    पंजाब निकाय चुनाव पर सियासी घमासान, भाजपा ने प्रक्रिया को बताया अवैध, चुनाव आयोग को सौंपा ज्ञापन

    Updated: Tue, 12 May 2026 02:07 PM (IST)

    भाजपा ने पंजाब नगर निगम चुनावों की प्रक्रिया को अवैध बताते हुए राज्य चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपा है। ...और पढ़ें

    चुनाव आयोग को मांग पत्र सौंपते हुए भाजपा नेता (फोटो: जागरण)

    चुनाव आयोग को मांग पत्र सौंपते हुए भाजपा नेता (फोटो: जागरण)

    HighLights

    1. भाजपा ने चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपकर उठाए सवाल।

    2. मतदाता सूची, वार्ड आरक्षण में गड़बड़ी का आरोप।

    3. अदालत की अवमानना बताते हुए प्रक्रिया रोकने की मांग।

    जागरण संवाददाता, बरनाला। पंजाब में होने जा रहे नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पंजाब के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य चुनाव आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर वर्तमान चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग मिलकर लोकतांत्रिक नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। भाजपा का यह प्रतिनिधिमंडल पंजाब भाजपा की राज्य कोर कमेटी के सदस्यों और राज्य उपाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में चुनाव आयुक्त से मिला।

    इस प्रतिनिधिमंडल में परमपाल कौर, रंजीत सिंह गिल, एन.के. वर्मा और मोहित गर्ग भी शामिल थे। भाजपा नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग ने स्वयं 30 अप्रैल 2026 को एक शेड्यूल जारी किया था, जिसके अनुसार आपत्तियों के निपटारे के लिए 11 मई 2026 और मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के लिए 12 मई 2026 की तारीख तय की गई थी।

    क्यों लगे कानून के उल्लंघन के आरोप?

    लेकिन हैरानी की बात यह है कि कई जिलों में इस अवधि के समाप्त होने से पहले ही अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। भाजपा नेताओं ने कहा कि माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में सरकार ने आश्वासन दिया था कि वार्डबंदी और मतदाता सूची के संबंध में सभी आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा।

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    लेकिन बिना किसी सुनवाई के अधिसूचना जारी करना अदालत की अवमानना है। भाजपा ने दावा किया है कि कई वार्डों में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या वहां की कुल जनसंख्या से भी अधिक दिखाई गई है, जो कि एक 'जनसांख्यिकीयअसंभव' बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्डों के आरक्षण में रोटेशन के नियमों को ताक पर रख दिया गया है।

    जहां एससी जनसंख्या अधिक है, उन वार्डों की अनदेखी कर कम जनसंख्या वाले वार्डों को आरक्षित कर दिया गया है। पार्टी ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा दिखाई जा रही जल्दबाजी विपक्षी दलों को तैयारी का मौका न देने की एक साजिश है ताकि चुनावों की निष्पक्षता को खत्म किया जा सके।

    भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने क्या कहा?

    भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि चुनाव आयोग ने तुरंत इन अवैध अधिसूचनाओं को वापस नहीं लिया और आपत्तियों का निपटारा नहीं किया, तो पार्टी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी और पूरी चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग करेगी।

    उन्होंने मांग की है कि चुनावी प्रक्रिया को तुरंत स्थगित किया जाए। आपत्तियों के निपटारे के लिए ''स्पीकिंग ऑर्डर'' जारी किए जाएं। मतदाता सूची के संशोधन के बाद उम्मीदवारों के चयन के लिए नया और उचित समय दिया जाए।