'युवा पीढ़ी को बचाना हमारी प्राथमिकता', पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए CM भगवंत मान का संकल्प
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब में नशामुक्ति अभियान की समीक्षा की और अधिकारियों को इसे और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने युवा पीढ़ी को नशों से ...और पढ़ें
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पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए CM मान का संकल्प। फोटो जागरण
HighLights
मुख्यमंत्री मान ने नशामुक्ति अभियान की समीक्षा की।
पुनर्वास केंद्रों की क्षमता 1500 से 5000 बेड हुई।
'सूरमा' पहल से नशामुक्त व्यक्ति बनेंगे प्रेरक।
जागरण संवाददाता, बठिंडा। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य में चल रहे युद्ध नशों के विरुद्ध अभियान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जब तक पंजाब पूरी तरह नशामुक्त नहीं हो जाता, तब तक इस अभियान को और अधिक प्रभावी एवं तेज गति से जारी रखा जाए। मुख्यमंत्री ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी डिप्टी कमिश्नरों (डीसी), पुलिस कमिश्नरों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) के साथ समीक्षा बैठक की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की जीरो टालरेंस नीति के तहत नशा तस्करों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि अभियान के तहत नशों की सप्लाई लाइन को काफी हद तक तोड़ दिया गया है तथा बड़े तस्करों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की युवा पीढ़ी को नशों से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले तीन महीनों में विलेज डिफेंस कमेटियों (वीडीसी) द्वारा नशा तस्करों के खिलाफ 13 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज करवाई गई हैं। उन्होंने सभी जिलों में इन समितियों की मासिक बैठकें सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और कहा कि स्वयं वे प्रत्येक माह राज्य स्तर पर इनकी कार्यप्रणाली की समीक्षा करेंगे। जिन जिलों में समितियां कम सक्रिय हैं, वहां जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
भगवंत मान ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांवों में नियमित दौरे करें, लोगों से संवाद स्थापित करें और नशा तस्करों की जानकारी देने वाले नागरिकों एवं समिति सदस्यों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखें।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि नशा तस्करों पर शिकंजा कसने के बाद बड़ी संख्या में नशा पीड़ित उपचार के लिए आगे आ रहे हैं। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की क्षमता में बड़ा विस्तार किया है। सरकारी केंद्रों में उपलब्ध बेड की संख्या 1,500 से बढ़ाकर 5,000 कर दी गई है। इसके अलावा नए केंद्र स्थापित किए गए हैं तथा मौजूदा केंद्रों में सुविधाओं का स्तर भी बेहतर बनाया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओटी) केंद्रों की संख्या भी 529 से बढ़ाकर 565 कर दी गई है तथा सभी केंद्रों पर आवश्यक दवाओं और अन्य सुविधाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने सूरमा पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दो वर्ष से अधिक समय तक नशामुक्त रह चुके व्यक्तियों को सूरमा के रूप में सम्मानित किया जाएगा। ये लोग समाज में नशा मुक्ति के प्रेरक दूत बनकर अन्य लोगों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे और सरकार के जागरूकता अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
भगवंत मान ने विश्वास जताया कि पंजाब पुलिस अपनी गौरवशाली परंपरा को कायम रखते हुए जनता के सहयोग से राज्य को पूरी तरह नशामुक्त बनाने में सफल होगी। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने का संकल्प है। उन्होंने अधिकारियों से माइक्रो स्तर पर प्रभावी योजना बनाकर अभियान को सफल बनाने और युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए नवीन पहल करने का आह्वान किया।