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    पंजाब की हाई सिक्योरिटी जेल में चूक, सिस्टम भी हुआ फेल; यहां रक्षक ही पकड़े गए तस्करी करते

    Updated: Fri, 08 May 2026 11:57 AM (IST)

    बठिंडा केंद्रीय जेल में लगातार सामने आ रहे नशा तस्करी मामलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में जेल कर्मचारियों और कैदियों की संलिप ...और पढ़ें

    पंजाब की हाई सिक्योरिटी बठिंडा सेंट्रल जेल। (फाइल फोटो)

    पंजाब की हाई सिक्योरिटी बठिंडा सेंट्रल जेल। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. बठिंडा जेल में नशा तस्करी के मामले लगातार बढ़ रहे।

    2. सीआरपीएफ सिपाही और सीनियर कांस्टेबल नशा सप्लाई करते पकड़े।

    3. जेल सुरक्षा में गंभीर विफलता, सुधार की तत्काल आवश्यकता।

    नितिन सिंगला, बठिंडा। पंजाब की हाई सिक्योरिटी बठिंडा की केंद्रीय जेल में लगातार सामने आ रहे नशा तस्करी के मामलों ने जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के दिनों में जेल के भीतर से अफीम, हेरोइन, जर्दा और अन्य प्रतिबंधित सामान की बरामदगी ने यह साफ कर दिया है कि जेल के अंदर सक्रिय नेटवर्क अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है।

    ताजा मामले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के सिपाही राजिंदर सिंह को तलाशी के दौरान गिरफ्तार किया गया। उसके पास से करीब 23.99 ग्राम अफीम, 158 ग्राम जर्दा और सिरिंज बरामद की गई। शुरुआती जांच में सामने आया कि यह सामान जेल के भीतर बंद कैदियों तक पहुंचाया जाना था। पूछताछ के दौरान आरोपित ने स्वीकार किया कि वह पैसों के लालच में यह काम कर रहा था।

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    बीते सप्ताह भी पकड़ा गया था सीनियर कांस्टेबल

    जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ ही सप्ताह पहले जेल प्रशासन ने सीनियर कांस्टेबल अंग्रेज सिंह को भी गिरफ्तार किया था। आरोप था कि वह अपनी पगड़ी में 34 ग्राम हेरोइन छिपाकर जेल के भीतर ले जाने की कोशिश कर रहा था। पूछताछ में उसने बताया कि वह A- कैटेगरी के गैंगस्टर सागर उर्फ मछली को नशा सप्लाई करता था और एक खेप पहुंचाने के बदले उसे करीब 20 हजार रुपये मिलते थे।

    पुलिस जांच में सामने आया कि अंगेज सिंह जिस गैंगस्टर को नशा पहुंचा रहा था, वह हत्या, लूट और संगठित अपराध के 50 से अधिक मामलों में आरोपित है। जांच एजेंसियों का मानना है कि जेल के भीतर बंद कई गैंगस्टर केवल नशे का सेवन ही नहीं करते, बल्कि अंदर से अपना नेटवर्क भी संचालित करने की कोशिश करते हैं।

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    हर साल पकड़े जा रहे तस्करी में लिप्त कर्मचारी

    पिछले कुछ वर्षों के रिकॉर्ड देखें तो 2019 में जेल गार्ड और पेस्को कर्मचारियों से नशीली गोलियां और मोबाइल फोन बरामद हुए थे। 2020 में एक पैरा लीगल वालंटियर कैदी तक मोबाइल फोन और जर्दा पहुंचाते पकड़ा गया। 2022 में एक जेल वार्डर को हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया, जबकि 2024 और 2025 में भी हेड वार्डर, एसआई और अन्य कर्मचारियों से नशा बरामद होने के मामले सामने आए।

    सवाल यह है कि यदि इतने वर्षों से लगातार घटनाएं सामने आ रही थीं, तो सुरक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार क्यों नहीं किए गए। इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू जेल के भीतर सक्रिय गैंगस्टर नेटवर्क है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हाई सुरक्षा जेल में भी लगातार नशा पहुंच रहा है तो यह केवल कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता नहीं बल्कि सुरक्षा प्रणाली की गंभीर विफलता को दर्शाता है। उनका मानना है कि जेलों में AI आधारित निगरानी प्रणाली, उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे, शरीर जांच यंत्र और डिजिटल गतिविधि निगरानी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

    जेलें नहीं रहीं सुधार ग्रह

    मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पूर्व जेल अधिकारियों का कहना है कि जेलों को सुधार और पुनर्वास का केंद्र माना जाता है। लेकिन यदि जेल के भीतर से ही नशे और अपराध का नेटवर्क चल रहा हो तो यह पूरे तंत्र के लिए चिंताजनक स्थिति है।

    अब पुलिस और जेल प्रशासन दोनों दावा कर रहे हैं कि मामलों की गहन जांच की जा रही है और यदि किसी अन्य कर्मचारी या नेटवर्क की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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