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    बठिंडा में 12 दिन से सफाई कर्मियों की हड़ताल, कूड़े के ढेर में तब्दील हुआ शहर, दुर्गंध और बीमारियों से जनता बेहाल

    Updated: Sun, 17 May 2026 11:37 AM (IST)

    बठिंडा में सफाई कर्मचारियों की 12 दिन से जारी हड़ताल के कारण शहर कूड़े के ढेर में तब्दील हो गया है, जिससे लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और दुर्गंध ...और पढ़ें

    बठिंडा में 12 दिन से सफाई कर्मियों की हड़ताल (फोटो: जागरण)

    बठिंडा में 12 दिन से सफाई कर्मियों की हड़ताल (फोटो: जागरण)

    HighLights

    1. 12 दिन से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल जारी।

    2. बठिंडा शहर में 1500 टन से अधिक कूड़ा जमा।

    3. 18 मई को निकाय मंत्री से होगी अहम बैठक।

    जागरण संवाददाता, बठिंडा। नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल रविवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गई। लगातार 12 दिनों से सफाई व्यवस्था ठप होने के कारण पूरा शहर कूड़े के ढेर में तब्दील हो चुका है।

    मुख्य सड़कें, बाजार, गलियां और रिहायशी इलाके गंदगी और बदबू से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे बन चुके हैं कि लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। भीषण गर्मी ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। शहरवासियों में अब डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का डर बढ़ने लगा है।

    नगर निगम के अनुमान के अनुसार शहर में डेढ़ हजार टन से अधिक कचरा जमा हो चुका है। शहर के अधिकांश इलाकों में पिछले करीब दो सप्ताह से घर-घर जाकर कूड़ा उठाने का काम बंद पड़ा है।

    लोगों के डस्टबिन भर चुके हैं

    लोगों के डस्टबिन भर चुके हैं और अब वे मजबूरी में कूड़ा प्लास्टिक बैगों व बोरियों में भरकर सड़क पर फेंकने को मजूबर हैं। कई स्थानों पर लोग घरों के बाहर ही कूड़ा फेंक रहे हैं, जिससे सड़कों पर गंदगी फैल चुकी है।

    अमरीक सिंह रोड, माडल टाउन, भागू रोड, भट्टी रोड, संतपुरा रोड, माल गोदाम रोड, बसंत विहार, ग्रीन सिटी रोड सहित कई पाश इलाकों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। बाजारों में दुकानों के सामने बदबू फैल रही है, जिससे कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक गंदगी और दुर्गंध के कारण बाजारों में आने से बच रहे हैं।

    निगम चुनाव से पहले बिगड़ती सफाई व्यवस्था बना बड़ा मुद्दा

    शहर में फैली गंदगी अब राजनीतिक मुद्दा भी बनती जा रही है। नगर निगम चुनाव नजदीक हैं और ऐसे समय में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराने से नगर निगम प्रशासन और सत्ताधारी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

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    शहरवासियों का कहना है कि यदि जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकला तो इसका असर आगामी निगम चुनाव में देखने को मिल सकता है। लोगों का कहना है कि नगर निगम और सरकार दोनों को समय रहते कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए था।

    अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पूरा शहर कूड़े में दब गया है। नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम सिर्फ बैठकों और दावों तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है।

    18 मई को निकाय मंत्री से बैठक, उसके बाद होगा फैसला

    सफाई कर्मचारी नियमितीकरण की मांग को लेकर नगर निगम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। यूनियन की ओर से लगातार रोष मार्च और प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इस बीच निगम प्रशासन और यूनियन नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया।

    अब सोमवार 18 मई को निकाय मंत्री के साथ यूनियन प्रतिनिधियों की बैठक प्रस्तावित है। यूनियन नेताओं का कहना है कि इस बैठक के बाद ही हड़ताल को लेकर अगला फैसला लिया जाएगा। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने के बजाय सरकार और निगम प्रशासन हर बार सिर्फ आश्वासन देकर मामला टाल देता है।

    दूसरी ओर निगम अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की कुछ मांगों पर सहमति बन चुकी है और बाकी मामलों को सरकार स्तर पर विचार के लिए भेजा गया है। हालांकि शहरवासियों का कहना है कि बातचीत और आश्वासनों के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को झेलनी पड़ रही है।

    32 डंपिंग प्वाइंट से बढ़कर बने 60 से ज्यादा अस्थायी कूड़ा स्थल

    नगर निगम के अनुसार शहर में 32 सेकेंडरी डंपिंग प्वाइंट निर्धारित हैं, लेकिन हड़ताल के चलते अब शहर में 60 से अधिक अस्थायी कूड़ा स्थल बन चुके हैं। कई जगह दुकानों के बाहर रखी ट्रॉलियां कूड़े से भर गई हैं। आवारा पशु और कुत्ते कूड़े को सड़कों पर फैला रहे हैं, जिससे स्थिति और खराब हो रही है।

    रिहायशी इलाकों में लोग नाक पर कपड़ा रखकर निकलने को मजबूर हैं। कई मोहल्लों में नालियां भी जाम होने लगी हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द सफाई नहीं हुई तो हालात और भयावह हो सकते हैं।

    स्वच्छ सर्वेक्षण-2026 पर भी मंडराया खतरा

    सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का असर स्वच्छ सर्वेक्षण-2026 पर भी पड़ सकता है। सफाई व्यवस्था से जुड़े हजारों अंक सीधे शहर की स्वच्छता पर आधारित होते हैं। केंद्रीय टीम कभी भी निरीक्षण के लिए पहुंच सकती है। ऐसे में शहर में फैली गंदगी निगम की रैंकिंग को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।

    नगर निगम लंबे समय से शहर को स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर स्थान दिलाने के दावे करता रहा है, लेकिन मौजूदा हालात ने इन दावों की पोल खोल दी है। शहरवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते नहीं जागा तो बठिंडा की छवि पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा।

    लोग बोले- अब बहानों नहीं, ठोस हल चाहिए

    शहरवासियों का कहना है कि अब नगर निगम और सफाई कर्मचारी यूनियन दोनों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। कर्मचारियों की मांगें यदि जायज हैं तो सरकार को तुरंत समाधान निकालना चाहिए, वहीं यूनियन को भी आम जनता की परेशानियों को देखते हुए सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए।

    लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती गंदगी अब सिर्फ प्रशासनिक विवाद नहीं रही, बल्कि जनस्वास्थ्य का गंभीर संकट बन चुकी है। यदि जल्द हड़ताल खत्म नहीं हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।