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    परिसीमन बिल को अकाली दल का समर्थन, PM मोदी से मुलाकात के बाद सुखबीर बादल का एलान

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 11:59 PM (IST)

    पीएम मोदी से मुलाकात के बाद शिरोमणि अकाली दल ने केंद्र सरकार के सदन में सभी राज्यों की सीटों में 50% वृद्धि के प्रस्ताव का समर्थन किया है। ...और पढ़ें

    परिसीमन बिल को अकाली दल का समर्थन। फाइल फोटो

    परिसीमन बिल को अकाली दल का समर्थन। फाइल फोटो

    HighLights

    1. अकाली दल ने केंद्र के 50% सीट वृद्धि प्रस्ताव का समर्थन किया।

    2. महिला आरक्षण और निष्पक्ष परिसीमन तत्काल लागू करने की मांग की।

    3. SGPC ने महिला आरक्षण का उदाहरण पहले ही प्रस्तुत किया है।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) में किसान आंदोलन के दौरान पड़ी दूरियां अब दोबारा नजदीकियों में बदलती नजर आ रही हैं। इसके संकेत पहले शुक्रवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शिअद प्रधान सुखबीर बादल की मुलाकात से मिले।

    इस मुलाकात के एक दिन बाद शनिवार को शिअद ने परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने की घोषणा कर दी है। शिअद के इस रुख से इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव दोनों की दल एकजुट होकर लड़ेंगे।

    पंजाब में सीटों में मामूली वृद्धि होगी

    हालांकि, इसकी पुष्टि दोनों ही दलों के किसी भी नेता ने नहीं की है। दिलचस्प बात यह है कि शिअद ने इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से अप्रैल माह में संसद में पेश परिसीमन विधेयक का विरोध किया था। यही नहीं, विपक्ष से मिलकर इसके खिलाफ यह कहते हुए वोट दिया था कि विधेयक में पंजाब के साथ भेदभाव किया गया है। पंजाब में सीटों में मामूली वृद्धि होगी, जबकि पड़ोसी राज्यों को अधिक लाभ होगा।

    अब शनिवार को सुखबीर बादल ने एक्स पर लिखा कि शिअद के वरिष्ठ नेताओं के साथ चंडीगढ़ में बैठक हुई। बैठक में फैसला लिया गया कि शिअद देश में महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग करता है। इसी तरह शिअद सभी राज्यों में सीटों के समान 50 प्रतिशत वृद्धि के केंद्र के प्रस्ताव का समर्थन करता है।

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    पार्टी नेताओं के साथ बैठक करते सुखबीर बादल।

    सुखबीर बादल ने लिखा शिअद सिख गुरुओं की शिक्षाओं से प्रेरणा लेता है, जिन्होंने महिलाओं की गरिमा, समानता और समान अधिकारों का समर्थन किया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने पहले ही अपने सदन में महिलाओं के आरक्षण का प्रविधान करके एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    सुखबीर ने कहा कि परिसीमन ऐसी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए, जिसमें सभी राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाए और किसी भी राज्य के साथ भेदभाव न हो। 2020 में टूटा था डेढ़ दशक पुराना गठबंधन शिअद-भाजपा गठबंधन 1996 में बना था। दोनों दलों ने मिलकर राज्य में तीन बार पहले 1997 और फिर 2007 से 2017 तक लगातार दो वर्ष सत्ता हासिल की।

    संसद में तीन कृषि कानून का समर्थन किया

    2020 में किसान आंदोलन के कारण शिअद ने पहले तो संसद में तीन कृषि कानून का समर्थन किया लेकिन राज्य में किसानों के आक्रोश को देखते हुए बाद में इसका विरोध करते हुए भाजपा से अपना नाता तोड़ लिया।

    इसके बाद दोनों ही पार्टियों ने 2022 में विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव अलग-अलग होकर लड़े लेकिन दोनों को ही हार का सामना करना पड़ा। दोनों ही दलों के नेता इस बात से परिचित हैं कि अगर 2027 में राज्य में सत्ता में वापसी करनी है तो दोनों को एक होना ही होगा।

    प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात और अब दोनों विधेयकों का शिअद की ओर से समर्थन करने से इसकी संभावना और बढ़ गई है।