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    चंडीगढ़ निगम चुनाव से पहले भाजपा में बढ़ने लगी अंदरूनी कलह, मेयर जोशी के खिलाफ लामबंद होने लगे पार्षद

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 12:52 PM (IST)

    चंडीगढ़ भाजपा में निगम चुनाव से पहले अंदरूनी कलह बढ़ने लगी है। कई पार्षद मेयर सौरभ जोशी के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। पार्षद मेयर पर महत्वप ...और पढ़ें

    कई पार्षद मेयर सौरभ जोशी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे।

    कई पार्षद मेयर सौरभ जोशी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे।

    HighLights

    1. भारतीय जनता पार्टी के पार्षद अपने ही मेयर के हुए खिलाफ।

    2. कई पार्षद मेयर के खिलाफ मोर्चा खोलने की कर चुके तैयारी।



    3. पहले भाजपा अध्यक्ष से नाराजगी अभी तक नहीं हुई दूर।

    बलवान करिवाल, चंडीगढ़। निगम चुनाव नजदीक आ रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में अंदरूनी कलह बढ़ती नजर आ रही। अभी तक कई पार्षदों और नेताओं की अध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा से नाराजगी दूर नहीं हुई थी। पार्षद अध्यक्ष की बुलाई प्री हाउस बैठकों तक में नहीं पहुंच रहे हैं। अब कई पार्षद अपने ही मेयर सौरभ जोशी के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर चुके हैं।

    कई पार्षद मेयर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। वह मेयर पर शहर के महत्वपूर्ण प्रस्ताव निगम सदन में बिना चर्चा के ही पास किए जाने से नाराज हैं। पार्षद पहले भी अपने पार्षदों की बजाए विपक्षी पार्षदों को ज्यादा मौका दिए जाने के आरोप मेयर पर लगाते रहे हैं।

    यह नाराज पार्षद इस सप्ताह मेयर के खिलाफ धरना तक शुरू करने की योजना बना चुके हैं। अगर ऐसा होता है तो यह मेयर ही नहीं भारतीय जनता पार्टी की मुश्किल भी बढ़ा सकता है। बताया जा रहा है कि इन पार्षदों ने मेयर की शिकायत पार्टी अध्यक्ष से भी की है।

    भाजपा के कई पार्षद निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली से भी खुश नहीं हैं। पार्षद कंवरजीत सिंह राणा ने तो निगम सदन की बैठक में काम नहीं होने पर सप्ताह बाद धरने पर बैठने की चेतावनी तक दे रखी है।

    उन्होंने निगम अधिकारियों पर कई तरह के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बुड़ैल एरिया में चार-चार फीट तक जलभराव होने का मामला उठाया था। साथ ही रोड गलियों की सफाई के मामले में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए थे।

    अहम प्रस्ताव पर चर्चा न होना भी एक वजह

    मेयर के खिलाफ पार्षदों की नाराजगी की एक वजह कई प्रमुख प्रस्ताव बिना चर्चा के ही पास करना भी है। इनमें सेक्टर-25 के सूखा कचरा प्रसंस्करण का प्लांट एजेंसी को दिए जाने का आरएफपी भी बिना चर्चा के पास किया गया है।

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    इसके अलावा भी करीब 11 प्रस्ताव बिना चर्चा के ही पास किए गए थे। भाजपा के कई पार्षदों का आरोप है कि कांग्रेस और आप पार्षदों के साथ मिलकर यह प्रस्ताव बिना चर्चा ही पास किए गए।

    चुनाव से पहले बढ़ रही कलह
    जैसे जैसे निगम चुनाव नजदीक आ रहे हैं भाजपा में कलह बढ़ती जा रही है। यह कलह और नाराजगी चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचाएगी। साल के अंत में निगम चुनाव होने हैं। वहीं कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में जुटी है। भाजपा के असंतुष्ट पार्षदों के रुख पर कांग्रेस की नजर है। आप ने पार्षद प्रत्याशी चयन के लिए अभियान भी शुरू कर दिया है।