पंजाब में दलित वोट बैंक को साधने की बीजेपी की नई रणनीति, एक फरवरी को डेरा बल्लां का दौरा करेंगे PM मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 फरवरी को जालंधर के डेरा बल्लां में गुरु रविदास प्रकाश पर्व में शामिल होंगे। इसे भाजपा की 2027 विधानसभा चुनाव के लिए दलित व ...और पढ़ें
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प्रधानमंत्री मोदी का डेरा बल्लां दौरा, पंजाब में दलित वोट बैंक पर बीजेपी की नजर। फाइल फोटो
HighLights
PM मोदी 1 फरवरी को डेरा बल्लां, जालंधर आएंगे
यह दौरा 2027 पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण
भाजपा दलित समुदाय में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है
कैलाश नाथ, चंडीगढ़। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जालंधर स्थिति सचखंड डेरा बल्लां में गुरु रविदास जी प्रकाश पर्व में हिस्सा लेने के लिए 1 फरवरी को आएंगे। प्रधानमंत्री के इस दौरे के कई राजनीतिक अर्थ भी लगाए जा रहे हैं। पंजाब में और खास कर दोआबा में डेरा बल्लां रविदास समुदाय का केंद्र है।
माना जा रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में डेरा बल्लां प्रमुख संत निरंजन दास को पद्मश्री के सम्मानित करने का फैसला और अब प्रधानमंत्री का यह दौरा भाजपा के लिए 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए काफी लाभदायक सिद्ध हो सकता है।
अभी तक भाजपा श्री गुरु रविदास जी का प्रकाश पर्व बनारस में बड़े स्तर पर मनाती रही है। बनारस में ही गुरु रविदास जी का भव्य मंदिर भी बन रहा है। यह पहला मौका होगा जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जालंधर में डेरा बल्लां में नतमस्तक होने के लिए आएंगे। उनके इस दौरे से भाजपा नेतृत्व बेहद उत्साहित है।
दूसरी तरफ कांग्रेस खेमे में बेचैनी बढ़ गई है। एससी भाईचारा मुख्य रूप से कांग्रेस से जुड़ा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भले ही कांग्रेस 77 से 18 सीटों पर सिमट गई हो लेकिन दोआबा में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा था। वहीं, तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस जालंधर की सीट जीतने में कामयाब हो गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस में दलित चेहरा बनने की दौड़ में हैं।
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पिछले दिनों कांग्रेस की एससी विंग की बैठक में उन्होंने कहा था कि प्रधान, विपक्ष का नेता, महिला कांग्रेस की प्रधान और तो और संगठन महामंत्री भी अपर कास्ट का है। जिसे लेकर कांग्रेस में खासा हंगामा मच गया था। कांग्रेस जहां एससी-जट्ट की राजनीति में उलझी हुई है।
वहीं, प्रधानमंत्री का डेरा बल्लां आना भाजपा का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। राज्य में भले ही 34 सीटें रिजर्व हों लेकिन इनमें से 18-19 ऐसी सीटें हैं जहां पर डेरा बल्लां का सीधा प्रभाव रहता है। हालांकि अभी तक डेरा बल्लां कभी भी खुल कर किसी भी राजनीतिक पार्टी के समर्थन में नहीं आता रहा है लेकिन भाजपा नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री के आने से दलित समुदाय में अच्छा संकेत जाएगा। इसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है।