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    चंडीगढ़ में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर, गुजरात माॅडल पर होने जा रहा है बड़ा बदलाव; उद्योगों को मिलेगी रफ्तार

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 07:00 AM (IST)

    चंडीगढ़ प्रशासन गुजरात मॉडल पर आधारित नई औद्योगिक नीति ला रहा है, जिसका उद्देश्य उद्योगों की लागत कम करना, निवेश बढ़ाना और रोजगार के अवसर पैदा करना है ...और पढ़ें

    प्रशासन ने नई औद्योगिक नीति बनाने का फैसला लिया है।

    प्रशासन ने नई औद्योगिक नीति बनाने का फैसला लिया है।

    HighLights

    1. गुजरात मॉडल पर आधारित नई औद्योगिक नीति बनेगी।

    2. उद्योगों को वित्तीय सहायता और टैक्स में रियायतें मिलेंगी।

    3. मौजूदा उद्योगों को मजबूत कर रोजगार बढ़ाना लक्ष्य।



    राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। शहर में उद्योग लगाने और पहले से चल रहे उद्योगों को बढ़ाने के लिए प्रशासन ने नई औद्योगिक नीति बनाने का फैसला लिया है। इस नीति का मकसद उद्योगपतियों की लागत कम करना, नए निवेश को बढ़ावा देना और शहर में रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा करना है।

    यह नीति केंद्र सरकार के निर्देश पर गुजरात माॅडल को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। हाल के वर्षों में लद्दाख में भी अपनाया गया है।नई नीति का फोकस उद्योगों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता, टैक्स एवं बिजली शुल्क में रियायतें और कारोबार को आसान बनाकर शहर में निवेश और रोजगार बढ़ाना होगा ।

    प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नई नीति में उद्योगों को कई तरह की आर्थिक मदद दी जाएगी। उदाहरण के लिए यदि किसी फैक्टरी को अपने उत्पाद का सर्टिफिकेट बनवाने, फूड टेस्टिंग, क्वालिटी टेस्ट या एक्सपोर्ट लाइसेंस लेने पर 10 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं तो सरकार तय सीमा तक 5 लाख रुपये तक की सहायता दे सकती है।

    इसके अलावा बिजली बिल में राहत, कुछ सरकारी फीस में छूट और अन्य प्रोत्साहन भी दिए जा सकते हैं। इससे उद्योगों का खर्च कम होगा और वे दूसरे राज्यों के उद्योगों से बेहतर मुकाबला कर सकेंगे। नीति का लक्ष्य उद्योगों की लागत कम हो और वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें।

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    इस नीति में स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क में छूट दी जाएगी जिसका फायदा जमीन खरीदने पर मिलेगी। इंडस्ट्रियल एडवाइजरी कमेटी का भी गठन किया जाएगा। हाल ही में प्रशासन के अधिकारियों की गृह मंत्रालय के साथ बैठक हुई थी जिसमे नई नीति बनाने के लिए कह गया है।

    जमीन की कमी, चालू उद्योग किए जाएंगे मजबूत

    शहर में जमीन की कमी होने के कारण नई नीति में नए इंडस्ट्रियल प्लाट देने की बजाय पहले से चल रहे उद्योगों को मजबूत करने पर जोर रहेगा। उद्योगों को नई मशीनें लगाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

    खास फोकस छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) पर रहेगा, क्योंकि इन्हीं से सबसे ज्यादा रोजगार मिलता है। प्रशासन के अनुसार उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए स्टार्टअप पाॅलिसी की तर्ज पर 50 से 100 करोड़ रुपये तक का विशेष फंड भी बनाया जाएगा।

    इस राशि से अलग-अलग सब्सिडी और सहायता योजनाएं चलाई जाएंगी।प्रशासन उद्योग संगठनों से सुझाव लेने के बाद नीति का अंतिम मसौदा तैयार करेगा और फिर मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजेगा।  इससे पहले प्रशासन ने साल 2015 में औद्योगिक नीति बनाई थी।

    पहले की नीति में यह था शामिल

    वर्ष 2015 की औद्योगिक नीति में उद्योगों के लिए ऑनलाइन मंजूरी, सिंगल विंडो सिस्टम और ईज आफ डूइंग बिजनेस जैसे प्रविधान थे। नई नीति में इन्हें और मजबूत किया जाएगा।

    सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि पहली बार उद्योगों को सर्टिफिकेशन, फूड टेस्टिंग, एक्सपोर्ट लाइसेंस जैसे खर्चों पर आर्थिक मदद, बिजली शुल्क और अन्य सरकारी फीस में रियायत देने की योजना बनाई जा रही है। इससे उद्योग लगाना और कारोबार बढ़ाना पहले के मुकाबले आसान हो सकता है।

    गुजरात की नीति निवेश के अनुकूल

    गुजरात औद्योगिक नीति को देश की सबसे निवेश-अनुकूल नीतियों में माना जाता है। यह नई औद्योगिक इकाइयों और विस्तार करने वाली इकाइयों को पूंजी निवेश पर वित्तीय सहायता देती है। उद्योगों को लिए गए ऋण पर ब्याज में रियायत दी जाती है। सभी सरकारी मंजूरियां एक ही पोर्टल से होती है ताकि कारोबार शुरू करने में देरी न हो।