गवाहों के बदलते बयानों से कमजोर पड़ा केस, चंडीगढ़ Court ने हत्या का प्रयास केस में तीन युवक किए बरी
चंडीगढ़ जिला अदालत ने आठ साल पुराने हत्या के प्रयास मामले में तीन आरोपितों को बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष सबूत पेश करने में विफल रहा और गवाहों के बदलते ...और पढ़ें

जिला अदालत ने सबूतों के अभाव में तीन युवकों को किया बरी।
HighLights
तीन आरोपी आठ साल पुराने मामले में बरी हुए।
अभियोजन पक्ष कोर्ट में आरोप साबित करने में विफल रहा।
गवाहों के बदलते बयानों से आरोपियों को लाभ मिला।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। आठ साल पुराने हत्या के प्रयास, घर में घुसकर हमला और तोड़फोड़ करने के मामले में जिला अदालत ने तीन आरोपितों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वाले युवक रामदरबार निवासी दीपक उर्फ दीपा, गौरव और दलीप हैं।
इनके खिलाफ वर्ष 2018 में सेक्टर 31 थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। मामले में सबसे अहम गवाहों के बार-बार बदलते बयानों और विरोधाभासों का लाभ आरोपितों को मिला।
आरोपितों का केस लड़ने वाले एडवोकेट विजय कुमार ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाहों ने पहले अपने बयान बदल दिए और आरोपितों को पहचानने से इनकार कर दिया। दोबारा गवाही करवाई गई तो उन्होंने फिर अपने बयान बदल दिए।
एडवोकेट विजय ने कहा कि ऐसे विरोधाभासी बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस तर्क को महत्वपूर्ण मानते हुए माना कि अभियोजन पक्ष विश्वसनीय और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
यह है मामला
14 मार्च 2018 की शाम दीपक उर्फ दीपा, गौरव और अन्य लोग तलवार व डंडों से लैस होकर शिकायतकर्ता के घर में घुस आए। आरोपितों ने घर में तोड़फोड़ की और आशा देवी व उनके छोटे बेटे पूरन पर हमला किया।
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शिकायत के अनुसार दीपक ने आशा देवी के सिर पर धारदार हथियार से वार किया, जबकि पूरन की आंख पर भी हमला किया गया। वारदात के बाद आरोपित जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए थे। इसी शिकायत पर पुलिस ने हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी।