चंडीगढ़ में घर बैठे बनेगा रेंट एग्रीमेंट, कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मिलेगा छुटकारा; जल्द शुरू होगा ऑनलाइन पोर्टल
चंडीगढ़ प्रशासन जल्द ही एक ऑनलाइन टेनेंसी पोर्टल लॉन्च करेगा। इससे मकान मालिक और किरायेदार घर बैठे ही रेंट एग्रीमेंट बनवा सकेंगे। यह पोर्टल यूआईएन, कि ...और पढ़ें

किरायेदारी समझौते का लिए चंडीगढ़ में मिलेगी नई सुविधा।
HighLights
ऑनलाइन टेनेंसी पोर्टल को यूजर-फ्रेंडली बनाने के निर्देश।
7 दिन में मिलेगा यूआईएन, विवादों का त्वरित समाधान।
तहसीलदार को किराया तय करने, विवाद सुलझाने का अधिकार।
राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। चंडीगढ़ में मकान मालिकों और किरायेदारों के लिए अच्छी खबर है। रेंट एग्रीमेंट के लिए अब कोर्ट-कचहरी के चक्करों से छुटकारा मिलेगा। घर बैठे ही ऑनलाइन इसे बनवा सकेंगे। इसके लिए प्रशासन जल्द ही टेनेंसी पोर्टल लॉन्च करेगा।
जिला उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने मंगलवार को पोर्टल की लाॅन्चिंग को लेकर विस्तृत समीक्षा की है। उन्होंने पोर्टल को आम लोगों के लिए अधिक सरल, सुरक्षित और स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। यह भी कहा कि पोर्टल यूजर-फ्रेंडली होना चाहिए।
एनआइसी अधिकारियों ने बताया कि पोर्टल के माध्यम से शहरवासी serviceonline.gov.in पर जाकर किरायेदारी समझौते का पंजीकरण, यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईएन) प्राप्त करने, किराया संशोधन के लिए आवेदन तथा शिकायतों के ऑनलाइन निस्तारण जैसी सुविधाओं का भी लाभ उठा सकेंगे।
30 दिन में मांगे गए सुझाव
प्रशासन ने चंडीगढ़ टेनेंसी रूल्स-2026 का मसौदा सार्वजनिक कर दिया है। इन नियमों पर आम लोगों, मकान मालिकों, किरायेदारों और अन्य संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। सुझाव एस्टेट ऑफिस में जमा कराए जा सकते हैं। नियम असम टेनेंसी एक्ट-2021 की धारा 44 के तहत बनाए गए हैं, जिसे शहर में लागू किया गया है।
क्या होंगे नए नियम
नए नियमों के अनुसार किसी भी किरायेदारी समझौते की जानकारी दो महीने के भीतर ऑनलाइन तहसीलदार को देना अनिवार्य होगी। पंजीकरण के बाद सात दिनों के भीतर यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूआईएन) जारी किया जाएगा, जिससे मकान मालिक और किरायेदार दोनों के पास कानूनी रिकाॅर्ड उपलब्ध रहेगा।
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पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाने वाला पूरा सिस्टम स्थानीय भाषा में भी होगा, ताकि आम लोगों को इसका उपयोग करने में परेशानी न हो। किरायेदारी से जुड़ा पूरा डेटा केवल संबंधित पक्षों और अधिकृत अधिकारियों तक ही सीमित रहेगा तथा किसी भी ऑनलाइन आवेदन के लिए ओटीपी आधारित सत्यापन अनिवार्य होगा, जिससे फर्जी पंजीकरण पर रोक लग सके।
तहसीलदार के पास जमा करा सकेंगे किराया
नियमों के तहत तहसीलदार को किराया तय करने और संशोधित करने का अधिकार होगा। यदि किसी मामले में विवाद होता है तो उसे सरकार से मान्यता प्राप्त वैल्यूअर के पास भेजा जाएगा। यदि मकान मालिक किराया लेने से इनकार करता है तो किरायेदार तहसीलदार के पास किराया जमा करा सकेगा, जिससे उसे बेदखली या उत्पीड़न से सुरक्षा मिलेगी।
इसी प्रकार मकान मालिक या उसके कानूनी उत्तराधिकारी किरायेदार से कब्जा वापस लेने के लिए अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) के समक्ष आवेदन कर सकेंगे। आदेशों को लागू कराने के लिए एडीसी आवश्यकतानुसार अधिकारियों या अधिवक्ताओं की नियुक्ति भी कर सकेंगे।
120 दिन में अपील का निपटारा
नियमों में विवादों के समयबद्ध समाधान का भी प्रविधान किया गया है। जवाब दाखिल करने के लिए 15 से 30 दिन का समय होगा, जबकि ट्रिब्यूनल में दायर अपीलों का निपटारा 120 दिनों के भीतर किया जाएगा। बकाया राशि या रिफंड पर ब्याज की दर एसबीआई की एमसीएलआर प्लस दो प्रतिशत होगी।
पक्षकार स्वयं या अपने अधिकृत प्रतिनिधि अथवा वकील के माध्यम से भी सुनवाई में उपस्थित हो सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि नई डिजिटल किरायेदारी व्यवस्था से शहर में किराये के मकानों का पूरा रिकाॅर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होगा, मकान मालिकों और किरायेदारों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा होगी, विवादों का त्वरित समाधान होगा और दीवानी अदालतों पर मुकदमों का बोझ भी काफी कम होगा।