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    चंडीगढ़ गोल्फ क्लब को बड़ा झटका; एक महीने में लागू करनी होगी RTI व्यवस्था, हाईकोर्ट का आदेश

    Updated: Fri, 29 May 2026 06:59 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ गोल्फ क्लब को बड़ा झटका देते हुए उसे आरटीआई के दायरे में आने का आदेश दिया है। क्लब को एक महीने के भीतर आरटीआई व् ...और पढ़ें

    चंडीगढ़ गोल्फ क्लब को आरटीआई के दायरे में लाने का आदेश।

    चंडीगढ़ गोल्फ क्लब को आरटीआई के दायरे में लाने का आदेश।

    HighLights

    1. क्लब को आरटीआई के दायरे में लाने का आदेश।

    2. केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले को रखा बरकरार।

    3. रियायतों के कारण क्लब सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित।

    दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ गोल्फ क्लब को बड़ा झटका देते हुए यह साफ कर दिया है कि सार्वजनिक जमीन और सरकारी रियायतों का लाभ लेने वाली संस्था पारदर्शिता से बच नहीं सकती।

    क्लब को लोक प्राधिकरण मानते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अब बहुत हो गया, अगर क्लब के सदस्य करदाताओं के पैसे पर गोल्फ खेलने का आनंद लेना चाहते हैं तो उन्हें जवाबदेही भी स्वीकार करनी होगी।

    हाईकोर्ट ने क्लब को सूचना का अधिकार कानून के तहत पब्लिक अथॉरिटी मानने के आदेश को बरकरार रखते हुए क्लब को एक महीने के भीतर आरटीआई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं।

    केंद्रीय सूचना आयोग ने 8 अक्टूबर 2012 को आदेश दिया था कि चंडीगढ़ गोल्फ क्लब आरटीआई कानून के तहत पब्लिक अथॉरिटी है और उसे सूचना अधिकार कानून लागू करना होगा। इसके खिलाफ क्लब ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और उसे 2012 में अंतरिम राहत मिल गई थी। अब हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश को सही ठहराया है।

    फैसले में अदालत ने क्लब को मिली भारी सरकारी रियायतों का विस्तार से जिक्र किया। कोर्ट के अनुसार वर्ष 2003 की दरों पर क्लब का आकलित मासिक किराया 33.45 लाख रुपये था, जबकि क्लब केवल 8,530 रुपये प्रतिमाह चुका रहा था। इसमें 8,200 रुपये किराया और 330 रुपये लीज शुल्क शामिल है। यानी क्लब वास्तविक आकलित किराये का सिर्फ 0.255 प्रतिशत ही दे रहा था।

    हाईकोर्ट ने माना कि यह रियायत अपने आप में पर्याप्त सरकारी वित्तीय सहायता का स्पष्ट उदाहरण है। गोल्फ क्लब चंडीगढ़ के बीचोंबीच 132 एकड़ प्राइम सरकारी जमीन पर बना है, जिसकी कीमत कम से कम 1000 करोड़ रुपये आंकी गई थी और वर्तमान में यह मूल्य कहीं अधिक हो सकता है।

    क्लब की इमारत, स्विमिंग पूल और अन्य ढांचे भी सार्वजनिक धन से बनाए गए थे और बाद में क्लब को लीज पर दे दिए गए। हाईकोर्ट ने माना कि क्लब के कामकाज पर यूटी प्रशासन का प्रभावी नियंत्रण है।

    अदालत ने लीज की कई शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि क्लब बिना प्रशासन की अनुमति कोई निर्माण या बदलाव नहीं कर सकता, प्रशासन कभी भी गोल्फ कोर्स और सुविधाओं का उपयोग मांग सकता है और क्लब की गवर्निंग बॉडी में प्रशासक द्वारा नामित तीन सदस्य पूर्ण मतदान अधिकार के साथ शामिल रहते हैं।

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    अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि यदि यूटी प्रशासन की ओर से सस्ती जमीन, भवन और भारी सब्सिडी वाली लीज न दी जाती तो क्लब का अस्तित्व संभव नहीं था। इसके बावजूद क्लब पारदर्शिता से बचना चाहता है, जो उसकी मंशा पर सवाल खड़े करता है।