चंडीगढ़ में सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, हर महीने 900 रुपये शुल्क से मिलेगा छुटकारा; करना होगा यह काम
चंडीगढ़ में सरकारी कर्मचारियों को प्रधानमंत्री सूर्य योजना के तहत लगे सोलर प्लांट के मासिक शुल्क से राहत मिलेगी। अब वे सोलर बिजली का उपयोग न करने पर 9 ...और पढ़ें

2030 तक चंडीगढ़ को देश का पहला कार्बन-मुक्त शहर बनाने का लक्ष्य।
HighLights
कर्मचारियों ने प्लांट हटाने तक की मांग प्रशासन से की थी।
सोलर बिजली उपयोग न करने पर सामान्य बिल का भुगतान।
प्रशासन को ग्रिड में बिजली बेचने से राजस्व मिलेगा।
राजेश ढल्ल, चंडीगढ़। सरकारी आवासों में रहने वाले कर्मचारियों को जल्द बड़ी राहत मिलने की संभावना है। जिन सरकारी मकानों की छतों पर प्रधानमंत्री सूर्य योजना के तहत सोलर पावर प्लांट लगाए गए हैं, उन्हें अब हर महीने अनिवार्य रूप से 900 रुपये का शुल्क नहीं देना पड़ेगा। प्रशासन ने इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार तीन किलोवाॅट क्षमता वाले सोलर पावर प्लांट के लिए कर्मचारियों से प्रति किलोवाट 300 रुपये यानी कुल 900 रुपये प्रतिमाह वसूले जाते हैं। कई कर्मचारियों का कहना है कि वे सोलर प्लांट से उत्पन्न होने वाली पूरी बिजली का उपयोग नहीं कर पाते, जिससे उन्हें हर महीने अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।
इसी वजह से कुछ कर्मचारियों ने प्लांट हटाने तक की मांग प्रशासन से की थी। प्रस्ताव के अनुसार जो कर्मचारी सोलर प्लांट से बनने वाली बिजली का उपयोग नहीं करना चाहेंगे, उनसे यह मासिक शुल्क नहीं लिया जाएगा।
वे केवल घर में सामान्य बिजली आपूर्ति की वास्तविक खपत के आधार पर ही बिजली बिल का भुगतान करेंगे और उनके घर की छत पर लगने वाले प्लांट से जो ऊर्जा पैदा होगी वह सीधे ग्रिड के पास चली जाएगी। उसको बेचकर जो राजस्व मिलेगा वह प्रशासन को मिलेगा।
वहीं, जो कर्मचारी सोलर ऊर्जा का उपयोग जारी रखेंगे, उनसे पहले की तरह तीन किलोवाॅट प्लांट के लिए 900 रुपये प्रतिमाह शुल्क लिया जाएगा। प्रशासन की मंजूरी मिलने के बाद नई व्यवस्था लागू होने की उम्मीद है। प्रशासन के अनुसार अगले माह इस पर निर्णय लेकर कर्मचारियों को राहत दे दी जाएगी ।
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प्लांट लगाने का खर्चा प्रशासन का
सरकारी मकानों पर सूर्य पीएम योजना के तहत प्लांट लगाने का खर्चा प्रशासन खुद वहन कर रहा है। निजी मकानों पर प्लांट लगाने का खर्चा लोगों पर पड़ता है। पहले शहर में दो माह का बिजली का बिल एक साथ आता था। पिछले छह माह से एक महीने का बिजली का बिल आ रहा है। कई सरकारी मकानों पर तीन किलोवाॅट से ज्यादा का भी प्लांट लगा है।
बड़े सरकारी मकानों पर छह किलोवाॅट का भी सोलर प्लांट लगा है। ऐसे में उनसे हर माह का यूजर चार्ज 1800 रुपये चार्ज किया जा रहा है। सरकारी कर्मचारी गोविंद हरी का कहना है कि सर्दी के मौसम में उनके घर का बिजली का बिल का प्रयोग उतना नहीं होता है जितना उनसे हर माह यूजर चार्ज वसूल किया जा रहा है।
उनका कहना है कि जो खपत से ज्यादा अतिरिक्त बिजली प्लांट से बनती है उसका भुगतान कर्मचारियों को नहीं किया जाता है। अतिरिक्त बनने वाली बिजली कर्मचारियों के अगले बिल में अडजस्ट होनी चाहिए। कर्मचारी नेता हरजिंदर सिंह का कहना है कि कर्मचारियों से जबरदस्ती शुल्क नहीं वसूला जाना चाहिए।
5400 सरकारी मकानों पर लगे हैं प्लांट
प्रशासन ने साल 2030 तक चंडीगढ़ को देश का पहला कार्बन-मुक्त शहर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सभी प्रमुख सरकारी कार्यालयों की इमारतों पर प्लांट लगाए जा चुके हैं। सरकारी मकान सेक्टर-7,20,21,22,23,24 27, 19, 23, 39,41 सेक्टर में बने हुए हैं।
इस समय शहर के कुल 6,200 सरकारी मकानों में 5400 की छतों पर सोलर पावर प्लांट लगे हुए हैं। 818 घरों पर पेड़ों की बाधा के चलते सोलर प्लांट नहीं लगाए जा सकते हैं। सोलर रूफटाप लगाने के लिए न्यूनतम 2 किलोवाॅट का स्वीकृत बिजली लोड होना आवश्यक है