'वर्ल्ड हेरिटेज दर्जा चंडीगढ़ के विकास में बाधा तो औचित्या क्या?' हाईकोर्ट की टिप्पणी; यूनेस्को प्रक्रियाओं पर उठाए सवाल
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ कैपिटल कॉम्प्लेक्स के वर्ल्ड हेरिटेज दर्जे पर सवाल उठाए हैं। मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि यदि यह दर्जा विकास में ब ...और पढ़ें

हाईकोर्ट भवन चंडीगढ़ के कैपिटल काॅम्प्लेक्स का हिस्सा है। भवन विस्तार पर यूनेस्को की प्रक्रियाएं बाधा।
HighLights
हाईकोर्ट भवन विस्तार मामले में मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी।
पूछा। यूनेस्को प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देता तो आगे क्या होगा।
प्रशासन को 'प्लान-बी' तैयार रखने के निर्देश।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ कैपिटल काॅम्प्लेक्स को मिले वर्ल्ड हेरिटेज दर्जे पर गंभीर सवाल उठाए। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट रूप से पूछा कि यदि यह दर्जा न्यायालय के विकास में बाधा बन रहा है, तो इसे बनाए रखने का औचित्य क्या है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा विकास कार्यों को नुकसान पहुंचा रहा है, तो इसे छोड़ने पर विचार किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि वर्तमान स्थिति में प्रशासन ऐसे संस्थानों पर निर्भर हो गया है जिन पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है।
यह टिप्पणी उस समय आई जब यूटी चंडीगढ़ प्रशासन ने अदालत को बताया कि हा कोर्ट परिसर में किसी भी प्रकार के निर्माण या विस्तार के लिए यूनेस्को द्वारा निर्धारित जटिल प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है। इनमें हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट (एचआईए) रिपोर्ट तैयार करना प्रमुख शर्त है।
हाईकोर्ट भवन चंडीगढ़ के कैपिटल काॅम्प्लेक्स का हिस्सा
प्रसिद्ध वास्तुकार ली कार्बूजिए द्वारा डिजाइन किया गया पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भवन चंडीगढ़ के कैपिटल काॅम्प्लेक्स का हिस्सा है, जिसे यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा प्रदान किया है।
इस कारण परिसर में किसी भी संरचनात्मक बदलाव या विस्तार प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। प्रस्तावित विस्तार योजना का कांसेप्ट नोट पहले ही फाउंडेशन ली कार्बूजिए को भेजा जा चुका है।
सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन ने बताया कि परियोजना को अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन योजना में शामिल करने के लिए भेजा गया है, जिसके बाद इसे यूनेस्को की बैठक में अंतिम स्वीकृति के लिए रखा जाएगा। यह प्रक्रिया आईकोमोस की तकनीकी सिफारिशों के बाद पूरी होगी।
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हालांकि, अदालत ने प्रशासन से वैकल्पिक योजना को लेकर भी स्पष्ट जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि यदि यूनेस्को प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देता तो आगे क्या होगा। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर अदालत ने प्रशासन को 'प्लान-बी' तैयार रखने के निर्देश दिए।
7 मार्च को सुनवाई, स्पष्ट खाका पेश करना होगा
अदालत ने यूटी प्रशासन को निर्देश दिया कि हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट और संबंधित रिपोर्टों की तैयारी के लिए सभी प्रशासनिक और वित्तीय सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए। मामले की अगली सुनवाई 7 मार्च को निर्धारित की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली तारीख पर एचआईए रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समयसीमा सहित परियोजना की प्रगति का स्पष्ट खाका पेश किया जाए।