चंडीगढ़ में न्यायिक ढांचे का कैसे होगा सुधार? प्रशासन ने प्रस्ताव भेजा न केंद्र से फंड मिला; संसद में उठा मुद्दा
चंडीगढ़ में न्यायिक ढांचे के विस्तार पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि प्रशासन ने न केंद्र को कोई प्रस्ताव भेजा और न ही उसे कोई फंड मिला है। सांसद मनी ...और पढ़ें

अदालतों में नया इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं किया गया।
HighLights
चंडीगढ़ प्रशासन ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव नहीं भेजा।
सांसद तिवारी के सवाल के जवाब में हुआ खुलासा।
हाईकोर्ट में स्वीकृत जजों से कम कोर्ट हॉल उपलब्ध हैं।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। शहर में अदालतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। पिछले महीने, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत ने इस पर जोर दिया था, लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहा है।
जानकारी के अनुसार, चंडीगढ़ प्रशासन को अदालतों के बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए केंद्र से कोई फंड नहीं मिला है। इसके अलावा, प्रशासन ने इस कार्य के लिए केंद्र को कोई प्रस्ताव भी नहीं भेजा। यह जानकारी केंद्र सरकार ने लोकसभा में चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी के सवाल के जवाब में दी।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि जिला और अधीनस्थ अदालतों के लिए कोर्ट हाल, जजों के आवास, वकीलों के चैंबर और अन्य सुविधाओं का विकास राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
केंद्र केवल केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) के तहत आर्थिक सहायता प्रदान करता है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट में स्वीकृत 85 जजों के मुकाबले केवल 69 कोर्ट हाल हैं। चंडीगढ़ में हाईकोर्ट जजों के लिए 64 आवास उपलब्ध हैं, जबकि 131 एडवोकेट्स चैंबर हैं।
जिला अदालत में 30 न्यायिक अधिकारियों के लिए 31 कोर्ट हाल, 29 आवास और 440 चैंबर हैं। पिछले पांच वर्षों में हाईकोर्ट के जजों के लिए तीन नए आवास तैयार किए गए हैं, लेकिन जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में केंद्र की योजना के तहत कोई नया इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं किया गया।
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सांसद तिवारी ने पूछे थे यह सवाल
सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में पूछा था कि शहर में न्यायिक ढांचे के लिए क्या योजनाएं बनीं और केंद्र से कितना फंड मिला। उन्होंने हाईकोर्ट और जिला अदालत में जजों के लिए कोर्ट रूम, आवास और वकीलों के चैंबर की जानकारी मांगी थी।