चंडीगढ़ कैशियर हत्याकांड में बड़ा खुलासा, नार्को-टेरर नेटवर्क बेनकाब'; पाकिस्तान से आ रहे नकली नोट, हथियार और आईस
चंडीगढ़ कैशियर जानकी दास हत्याकांड की जांच में पाकिस्तान से संचालित एक बड़े नार्को-टेरर और नकली नोट नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने ड्रोन के जरिए भ ...और पढ़ें

श्री कुमार मेडिकोज के कैशियर जानकी दास की गोलियां मारकर हत्या की थी।
HighLights
पाकिस्तान से ड्रोन द्वारा नकली नोट, हथियार, आइस की तस्करी।
3 किलो आइस, 8 लाख नकली नोट, विदेशी पिस्तौल बरामद।
किराये की जिगाना पिस्टल से हुई थी जानकी दास की हत्या।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकोज के कैशियर जानकी दास हत्याकांड की जांच ने पाकिस्तान से संचालित एक बड़े क्रास-बाॅर्डर नार्को-टेरर और फेक इंडियन करेंसी नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है।
जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान से लो-फ्लाइंग ड्रोन के जरिए भारतीय सीमा में गिराए जाने वाले विदेशी हथियार, हाई-ग्रेड आइस (मेथामफेटामाइन) और नकली नोट एक सुनियोजित नेटवर्क के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाए जा रहे थे।
डीएसपी क्राइम लक्ष्य पांडे के मार्गदर्शन और इंस्पेक्टर नरिंदर सिंह पटियाल के नेतृत्व में टीम ने पंजाब के तरनतारन और अमृतसर में कई दिनों तक चली छापेमारी के दौरान तीन आरोपितों गुरमीत सिंह उर्फ बादशाह, आकाश कुमार उर्फ मनी और सचिन सिल्वेस्टर को गिरफ्तार किया है।
इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड और कपूरथला जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर धर्मेंद्र सिंह उर्फ गोली को भी प्रोडक्शन वारंट पर हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 3.028 किलोग्राम आइस ड्रग, आठ लाख रुपये के नकली नोट, दो विदेशी पिस्तौल और मैगजीन बरामद किए हैं।
प्रारंभिक जांच में यह नेटवर्क पाकिस्तान, विदेश में बैठे गैंगस्टरों और पंजाब के सीमावर्ती जिलों में सक्रिय माड्यूल के बीच मजबूत कड़ी के रूप में सामने आया है।
ड्रोन से सीमा पार, फिर कई हाथों से गुजरती थी खेप
जांच में सामने आया कि पाकिस्तान में बैठे संचालक रात के समय लो-फ्लाइंग ड्रोन के जरिए पंजाब सीमा के नजदीक हथियार, ड्रग्स और नकली भारतीय मुद्रा गिराते थे। इसके बाद सीमा क्षेत्र में सक्रिय स्थानीय माड्यूल, जिन्हें नेटवर्क में पांडी कहा जाता है, इन खेपों को उठाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाते थे।
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इनका काम केवल कंसाइनमेंट उठाना नहीं था, बल्कि विदेश में बैठे गैंगस्टर्स के निर्देश पर तय स्थान पर सामान रखकर उसकी फोटो, वीडियो और लाइव लोकेशन भेजना भी था।
इसके बाद दूसरे व्यक्ति को वही लोकेशन भेजी जाती और वह खेप उठाकर अगले ठिकाने तक पहुंचाता। इसी तरह कई चरणों में सामान अंतिम सप्लायर तक पहुंचता था। आकाश कुमार उर्फ मनी तक भी इसी तरीके से खेप पहुंचती थी।
एन्क्रिप्टेड एप से चलता था नेटवर्क
पूरे गिरोह के सदस्य एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लीकेशन के जरिए संपर्क में रहते थे। सभी निर्देश विदेश में बैठे हैंडलरों और जेल में बंद गैंग्सटरों से मिलते थे। बातचीत और लोकेशन शेयरिंग ऐसे माध्यमों से की जाती थी।
चीन से पाकिस्तान, फिर भारत पहुंची जिगाना
जानकी दास की हत्या में इस्तेमाल विदेशी जिगाना पिस्तौल चीन से पाकिस्तान के रास्ते ड्रोन के माध्यम से भारत भेजा गया था। विदेश में बैठे गैंगस्टर ने यह हथियार पाकिस्तान के माध्यम से मंगवाया था। बाद में इसे करीब तीन लाख रुपये किराए पर गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों तक पहुंचाया गया। हत्या के बाद हथियार वापस नेटवर्क को लौटा दिया गया।
केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में हुई शामिल
पुलिस का मानना है कि बरामद आठ लाख रुपये के नकली नोट इस नेटवर्क का केवल एक हिस्सा हैं। अब यह पता लगाया जा रहा है कि सीमा पार से अब तक कितनी मात्रा में नकली भारतीय मुद्रा देश में पहुंच चुकी है और उसका इस्तेमाल किन राज्यों में किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में जुट गई हैं।