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    जीरो टॉलरेंस नीति...खुद के महकमे पर बात आते ही क्यों भुला दिया जाता है कायदा-कानून? चंडीगढ़ पुलिस पर उठे सवाल

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 02:50 PM (GMT+05:30)

    सीबीआई के पत्र के बावजूद चंडीगढ़ पुलिस मनीमाजरा एसएचओ पर कार्रवाई नहीं कर रही है। शराब ठेकेदार से रिश्वत मांगने के आरोपों पर पुलिस की 'जीरो टॉलरेंस' न ...और पढ़ें

    भ्रष्टाचार पर सख्ती के दावों पर चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद कठघरे में खड़े दिखाई दे रहे।

    भ्रष्टाचार पर सख्ती के दावों पर चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद कठघरे में खड़े दिखाई दे रहे।

    HighLights

    1. सीबीआई ने एसएचओ पर कार्रवाई की सिफारिश की।

    2. एसएचओ पर शराब ठेकेदार से अवैध वसूली का आरोप।

    3. चंडीगढ़ पुलिस की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर सवाल।

    मनोज बिष्ट, चंडीगढ़। जीरो टाॅलरेंस नीति का ढिंढोरा पीटने वाली स्मार्ट पुलिस पर सवाल उठे हैं कि खुद के महकमे पर बात आते ही कायदा-कानून क्यों भुला दिया जाता है। भ्रष्टाचार पर सख्ती के बड़े-बड़े दावे करने वाले वरिष्ठ अधिकारी खुद कठघरे में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

    वजह यह है कि सीबीआई के डीआईजी स्तर के अधिकारी ने करीब 15 दिन पहले चंडीगढ़ पुलिस के आला अधिकारियों को पत्र लिखकर मनीमाजरा थाना प्रभारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश की थी, गंभीर आरोपों के बावजूद आनकानी की गई।

    सवाल उठे कि आखिर चंडीगढ़ पुलिस किस दबाव में चुप है और इससे जीरो टाॅलरेंस नीति सिर्फ कागजों तक सीमित दिखाई दे रही हैं। अपने अधिकारियों पर आते ही सारे नियम बदल जाते हैं। हालांकि, विभाग के एक उच्चाधिकारी ने यह बात स्वीकार किया हैं कि सीबीआई का अधिकारिक पत्र उन्हें मिल चुका हैं। इस पर विचार-विमर्श चल रहा है।

    सीबीआई को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मनीमाजरा थाना प्रभारी एक शराब कारोबारी से हर महीने एक लाख रुपये और दो विदेशी शराब की पेटियां मांग रहा है।

    शिकायत के बाद सीबीआई ने मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट के आधार पर चंडीगढ़ पुलिस को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा था। लेकिन पत्र मिलने के बावजूद विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

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    गंभीर आरोपों में घिरे रहे हैं थाना प्रभारी

    यह पहला मामला नहीं है जब मनीमाजरा थाना प्रभारी विवादों में आए हों। इससे पहले भी क्षेत्र के लोगों ने बढ़ते अपराध और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासक से शिकायत की थी। स्थानीय लोगों का आरोप था कि क्षेत्र में अपराध बढ़ रहे हैं, लेकिन पुलिस प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम है।

    इसके बावजूद थाना प्रभारी को हटाने की जरूरत नहीं समझी गई। कुछ समय पहले इंटरनेट मीडिया पर एक गुमनाम शिकायत वायरल हुई थी, जिसे मनीमाजरा थाने में तैनात एक काॅन्स्टेबल की ओर से भेजा गया बताया गया।

    शिकायत में आरोप लगाया गया था कि थाना प्रभारी शराब के ठेकों, रेहड़ी-फड़ी वालों, सिगरेट विक्रेताओं और स्थानीय दुकानदारों से अवैध वसूली कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। शिकायत के अनुसार काॅन्स्टेबल को शराब ठेकों के बाहर ड्यूटी लगाने और अधिक ट्रैफिक चालान करने के निर्देश दिए गए।

    आरोप यह भी था कि एक बीट पर स्थायी तैनाती के बदले हर महीने एक लाख रुपये की अवैध वसूली करने को कहा गया और विरोध करने पर निलंबन व प्रताड़ना की धमकी दी गई।