चंडीगढ़ में रिटायर्ड SP रोशन लाल को राहत, शिकायतकर्ता ने कहा-केस बंद होने पर कोई आपत्ति नहीं
रिटायर्ड एसपी रोशन लाल को दो साल पुराने सीबीआई मामले में बड़ी राहत मिली है, क्योंकि शिकायतकर्ता महिला ने केस बंद करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। सीबी ...और पढ़ें

शिकायतकर्ता महिला ने भी कोर्ट में बयान दे दिया कि केस को बंद किए जाने पर आपत्ति नहीं।
HighLights
सीबीआई दायर कर चुकी है क्लोजर रिपोर्ट।
शिकायतकर्ता महिला ने भी हक में दिया बयान
मोबाइल टावर की लोकेशन शेयर करने का आरोप।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। यूटी पुलिस के रिटायर्ड एसपी रोशन लाल को दो साल पुराने आपराधिक मामले में बड़ी राहत मिली है। सीबीआई ने उन पर दर्ज हुए इस मामले में छह महीने पहले कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दे दी थी। अब शिकायतकर्ता महिला ने भी कोर्ट में आकर बयान दे दिया कि इस केस को बंद किए जाने पर उसे कोई आपत्ति नहीं।
सीबीआई ने दो साल पहले इसी महिला की शिकायत पर रोशन लाल और कम्युनिकेशन विंग के इंस्पेक्टर पवनेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उन पर शिकायतकर्ता महिला के मोबाइल टावर लोकेशन की जानकारी किसी के साथ साझा करने के आरोप थे।
हालांकि सीबीआई को दोनों के खिलाफ सबूत नहीं मिले थे, जिसके बाद जांच एजेंसी ने सीबीआई की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी थी। शिकायतकर्ता महिला ने अब कोर्ट में बयान दिया कि वह सीबीआई की जांच से संतुष्ट हैं। हालांकि अभी कोर्ट ने केस को बंद नहीं किया है, लेकिन शिकायतकर्ता महिला की इस गवाही से रिटायर्ड एसपी और इंस्पेक्टर को बड़ी राहत मिली है।
2020 में की थी मोबाइल ट्रैक होने की शिकायत
मामले की शुरुआत 23 नवंबर 2020 को हुई थी। महिला ने एसएसपी को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि कोई अज्ञात व्यक्ति उसके और उसके पति के मोबाइल नंबर को ट्रैक कर रहा है। शिकायत पर डीएसपी क्राइम के नेतृत्व में जांच करवाई गई थी।
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जांच में कम्युनिकेशन विंग के इंस्पेक्टर पवनेश कुमार पर आरोप लगा था कि उन्होंने तत्कालीन एसपी रोशन लाल के कहने पर टावर लोकेशन साझा की थी। विभागीय जांच के बाद मामला सीबीआइ को सौंपा गया।
सीबीआई ने रोशन लाल और पवनेश कुमार के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 120-बी और इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885 के तहत केस दर्ज किया था। हालांकि, करीब दो साल चली जांच में एजेंसी को दोनों अधिकारियों के खिलाफ आरोप साबित करने लायक सबूत नहीं मिले और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी गई।
दूसरे केस में पुलिसकर्मियों पर चार्जशीट
इसी शिकायतकर्ता महिला ने शहर के एक बड़े माल के जीएम अनिल मल्होत्रा पर छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे। महिला की यह भी शिकायत थी कि मल्होत्रा को पुलिस खुद बचाने की कोशिश कर रही थी। पुलिस ने उसे बचाने के लिए केस फाइल से उसका मोबाइल ही बदल दिया था।
जिस मोबाइल को जब्त किया गया था, उसमें कई अहम सबूत थे, लेकिन बाद में पुलिस ने उस मोबाइल को बदल कर दूसरा मोबाइल जब्त कर दिया। इस शिकायत की भी जांच सीबीआइ के पास पहुंची।
सीबीआई ने फिर दो साल पहले ही इंडस्ट्रियल एरिया थाने के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर रामरत्न और सब-इंस्पेक्टर सत्यवान के खिलाफ केस दर्ज किया था। उस केस में सीबीआई कोर्ट ने आरोपितों के खिलाफ संज्ञान ले लिया है और उन्हें कोर्ट में पेश होने के लिए समन भी कर दिया है।