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    सीमा सुरक्षा को लेकर चंडीगढ़ में उच्च स्तरीय बैठक; CISF के टॉप कमांडर्स ने बनाई रणनीति, हवाई अड्डा क्षेत्रों पर फोकस

    Updated: Fri, 29 May 2026 06:25 PM (IST)

    चंडीगढ़ में सीआईएसएफ के शीर्ष कमांडरों ने सीमा और हवाई अड्डा सुरक्षा चुनौतियों पर उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें ड्रोन खतरों, आधुनिक तकनीकों और जवानों के प ...और पढ़ें

    उच्च स्तरीय परिचालन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन।

    उच्च स्तरीय परिचालन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन।

    HighLights

    1. चंडीगढ़ में CISF कमांडरों की सीमा सुरक्षा पर उच्चस्तरीय बैठक।

    2. हवाई अड्डा सुरक्षा, ड्रोन खतरों से निपटने की रणनीति पर फोकस।

    3. जवानों का एंटी-ड्रोन प्रशिक्षण, क्यूआरटी सशक्तिकरण का लक्ष्य।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। सीमा सुरक्षा को लेकर शुक्रवार को चंडीगढ़ में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के टॉप कमांडर्स ने चुनौतियों से निपटने की रणनीति बनाई। हवाई अड्डा क्षेत्रों की सुरक्षा पर फोकस रहा। 

    उच्च स्तरीय परिचालन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने की। बैठक का उद्देश्य सीआईएसएफ के 'उत्तर क्षेत्र' और 'हवाई अड्डा क्षेत्र' की सुरक्षा तैयारियों, सामरिक रणनीतियों और परिचालन क्षमताओं का व्यापक मूल्यांकन करना था।

    संवेदनशील राष्ट्रीय प्रतिष्ठानों और नागरिक उड्डयन क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने और अंतः एजेंसी समन्वय को मजबूत करने पर एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया।

    उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात जैसे अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राज्यों में सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह समीक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। महानिदेशक ने सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन संबंधी खतरों और तोड़फोड़ विरोधी (एंटी-सेबोटेज) उपायों की समीक्षा की।

    कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों से निपटने के लिए सीआईएसएफ ने भारतीय सेना के सहयोग से एक 'चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम' शुरू किया है, जिसके तहत जवानों को संदिग्ध मानव रहित हवाई प्रणालियों को ट्रैक और निष्क्रिय करने का कड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही, जवानों के तनाव प्रबंधन के लिए 'आर्ट ऑफ लिविंग' जैसे कार्यक्रमों का भी सहारा लिया जा रहा है।

    विमानन सुरक्षा का आधुनिक डिजिटल स्वरूप

    रंजन ने कहा कि उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को वैश्विक स्तर पर लाने के लिए देश के हवाई अड्डों पर कई आधुनिक तकनीकों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।

    इनमें मुख्य रूप से यात्रियों के सुगम और कागज रहित आवागमन के लिए बायोमेट्रिक-आधारित डिजिटल सत्यापन प्रणाली, फुल बॉडी स्कैनर, सीसीटीवी वीडियो एनालिटिक्स और ऑटोमेटिक ट्रे रिटर्न सिस्टम, केंद्रीकृत एक्सेस कंट्रोल, पैरामीटर इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल सिस्टम शामिल है।

    महिला कमांडो और क्यूआरटी का सशक्तिकरण

    उन्होंने कहा कि हवाई अड्डों पर तैनात क्विक रिएक्शन टीम को मजबूत करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 49 विमानन सुरक्षा समूहों के 659 कमांडो 'बैटल इनोकुलेशन ट्रेनिंग' पूरी कर चुके हैं।

    खबरें और भी

    वर्ष 2026 के अंत तक सभी 72 हवाई अड्डों पर इसे लागू करने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त, विमानन सुरक्षा में अनुसंधान के लिए 'सीआईएसएफ विमानन सुरक्षा अकादमी' का प्रस्ताव विचाराधीन है और बेंगलुरु में विशेष महिला क्यूआरटी/कमांडो प्रशिक्षण केंद्र समर्पित किया गया है।