पंजाब कांग्रेस में बदलाव की आहट! दिल्ली पहुंच रहे वड़िंग, चन्नी और अमर सिंह, पायलट के सामने बड़ी चुनौती
दिल्ली में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक से संगठन में बदलाव की अटकलें तेज हुई हैं। सचिन पायलट ...और पढ़ें

पीपीसीसी प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग व चरणजीत सिंह चन्नी।
HighLights
भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट बने पंजाब कांग्रेस प्रभारी।
राजा वड़िंग, चन्नी और अमर सिंह दिल्ली में बैठक करेंगे।
पायलट के सामने गुटबाजी खत्म कर संगठन को मजबूत करना।
डाॅ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और मेनिफेस्टो कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अमर सिंह के दिल्ली पहुंचने से इन अटकलों को और बल मिला है।
दिल्ली में सोमवार को कांग्रेस सांसदों की अहम बैठक प्रस्तावित है। इसके साथ ही पंजाब के नेताओं की पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात भी हो सकती है। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ पंजाब के राजनीतिक हालात और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की संभावना है।
राहुल गांधी के भी पंजाब के नेताओं के साथ अगले दिनों में बैठक करने की संभावना है। पार्टी हाईकमान ने पांच सितंबर को भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी पद से हटाकर सचिन पायलट को नई जिम्मेदारी सौंपी थी। बघेल को अब असम का प्रभारी बनाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर एक धड़ा लगातार सवाल उठाता रहा है।
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पायलट का सभी नेताओं ने किया स्वागत
पायलट की नियुक्ति के बाद हालांकि कांग्रेस के दोनों धड़ों की ओर से सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पायलट को बधाई देते हुए सहयोग का भरोसा दिया है, जबकि राजा वड़िंग ने भी नए प्रभारी का स्वागत किया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि हाईकमान फिलहाल सभी नेताओं को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।
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चुनावी समितियों में भी फेरबदल संभव
बघेल की विदाई के बाद अब प्रदेश कांग्रेस की चुनावी समितियों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। विशेष रूप से उन समितियों में फेरबदल हो सकता है, जिनकी भूमिका आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुटबाजी खत्म कर नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने की है। पायलट को इसी उद्देश्य से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आठ सितंबर को पंजाब कांग्रेस की ओर से सरकारी कर्मचारियों के डीए और पुरानी पेंशन योजना के मुद्दे पर चंडीगढ़ में प्रदर्शन प्रस्तावित है। बघेल को इस प्रदर्शन में शामिल होना था, लेकिन प्रभारी बदलने के बाद पायलट के इसमें शामिल होने की संभावना कम मानी जा रही है। राहुल गांधी के 15 सितंबर के बाद प्रस्तावित पंजाब दौरे से पहले पायलट के पंजाब आने की संभावना है।
ऐसे में दिल्ली में होने वाली बैठकों में पायलट के संभावित पंजाब दौरे और राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर भी चर्चा हो सकती है। पंजाब में कांग्रेस के लिए अब संगठन को एकजुट करना और चुनावी तैयारियों को गति देना पायलट की पहली बड़ी परीक्षा होगी।
