CJP प्रोटेस्ट के बीच किसानों का दिल्ली कूच, हरियाणा में शंभू बॉर्डर सील; सुरक्षा बढ़ाई
देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते के विरोध में 21 जुलाई को दिल्ली में किसान महापंचायत होगी। ...और पढ़ें
HighLights
21 जुलाई को दिल्ली में किसान महापंचायत का आयोजन।
भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते का विरोध मुख्य मुद्दा।
शंभू बॉर्डर पर किसानों को रोकने की हरियाणा पुलिस की तैयारी।
संवाद सूत्र, शंभू/पटियाला। देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर 21 जुलाई को दिल्ली स्थित किसान घाट पर भारत–अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के विरोध में विशाल किसान महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है।
पंजाब से दिल्ली को रवाना हो रहे किसानों को हरियाणा पुलिस ने शंभू बार्डर पर ही रोकने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। घग्गर पुल पर हरियाणा पुलिस ने बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग कर दी है।
यातायात को बाधित होने से रोकने और किसानों के काफिलों को दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने से रोकने के लिए प्रशासन ने मौके पर भारी संख्या में पुलिस कर्मियों के साथ-साथ जेसीबी और क्रेन जैसी भारी मशीनों की तैनाती की है।
फिलहाल नेशनल हाईवे-44 को पूर्णतः सील नहीं
फिलहाल नेशनल हाईवे-44 को पूर्णतः सील नहीं किया गया है, लेकिन स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उधर, अमृतसर से काफिले के साथ फतेहगढ़ साहिब पहुंचे किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन भारत-अमेरिका ट्रेड डील को रद करवाने पर केंद्रित है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ है, न कि हरियाणा सरकार या पुलिस के विरुद्ध। पंधेर ने बताया कि किसान मजदूर मोर्चा (पंजाब चैप्टर), संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम), भारतीय किसान यूनियन एकता संघर्ष सहित विभिन्न किसान संगठनों के जत्थे भी अलग-अलग जिलों से दिल्ली पहुंचेंगे।
उन्होंने कहा कि किसान फतेहगढ़ साहिब से सुबह पांच बजे कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें रोका गया, तो किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे और हरियाणा पुलिस के साथ किसी भी प्रकार का टकराव नहीं होगा।
खबरें और भी
किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल अधिकारियों से बातचीत करने पहुंचा
किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल अधिकारियों से बातचीत करने के लिए शंभू सीमा पर पहुंचा। सरवन सिंह पंधेर, तेजवीर सिंह पंजोखरा और दिलबाग सिंह गिल सहित किसान नेताओं ने हरियाणा पुलिस अधिकारियों से बातचीत की। हरियाणा पुलिस अधिकारियों ने इस बारे में अपना फैसला बताने के लिए किसानों से कुछ समय मांगा है
यहां वर्णनीय है कि पंजाब-हरियाणा सीमा पर स्थित शंभू बार्डर वर्ष 2024–25 में किसानों के लंबे आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना। यह आंदोलन 13 फरवरी 2024 को उस समय शुरू हुआ, जब विभिन्न किसान संगठनों ने "दिल्ली चलो" मार्च का आह्वान किया। हरियाणा पुलिस ने किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए शंभू और खनौरी बार्डर पर बैरिकेडिंग, कंक्रीट अवरोध और सुरक्षा बल तैनात कर दिए, जिसके बाद हजारों किसान शंभू बार्डर पर ही धरने पर बैठ गए।
इस आंदोलन का नेतृत्व मुख्य रूप से किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने किया। किसानों की प्रमुख मांगों में सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, किसानों और खेत मजदूरों की कर्जमाफी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना, आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेना तथा किसान परिवारों के लिए विभिन्न कल्याणकारी उपाय शामिल थे।
किसानों ने दिल्ली की ओर बढ़ने का प्रयास किया
आंदोलन के दौरान कई बार किसानों ने दिल्ली की ओर बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान आंसू गैस के गोले, पानी की बौछार और अन्य भीड़ नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई किसान घायल हुए। शंभू बार्डर पर ट्रैक्टर-ट्रालियों और अस्थायी ढांचों के साथ एक तरह का अस्थायी शिविर बन गया, जहां किसान महीनों तक बैठे रहे। लंबे समय तक राष्ट्रीय राजमार्ग बंद रहने से व्यापार, उद्योग और आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।
करीब 400 दिनों तक चले इस आंदोलन के बाद मार्च 2025 में पंजाब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शंभू और खनौरी बार्डर से धरना स्थल हटवा दिए और कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया। इसके बावजूद किसान संगठनों ने अपनी मांगों को जारी रखने का ऐलान किया।