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    गृहिणी के योगदान का मूल्य सम्मान में तय हो, हादसे में मृत महिला के परिवार को बड़ी राहत; क्या बोला हाई कोर्ट?

    Updated: Sat, 25 Apr 2026 03:53 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में मृत गृहिणी के परिवार को बड़ी राहत दी है। अदालत ने गृहिणी के योगदान को बहुआयामी मानते हुए मुआवजे की रा ...और पढ़ें

    पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो

    पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो

    HighLights

    1. गृहिणी का योगदान पैसों से अधिक मूल्यवान

    2. हाई कोर्ट ने मुआवजा 4.55 लाख से बढ़ाया

    3. मृत गृहिणी के परिवार को 16.92 लाख मिले

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा कि गृहिणी द्वारा परिवार को दिया जाने वाला योगदान केवल पैसों में नहीं आंका जा सकता।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि घर संभालने वाली महिला की भूमिका बहुआयामी होती है, जिसमें आर्थिक बचत से लेकर भावनात्मक सहारा तक शामिल है। जिसका सटीक मूल्यांकन संभव नहीं है। यह टिप्पणी अदालत ने एक सड़क दुर्घटना मामले में मुआवजे की राशि में भारी बढ़ोतरी करते हुए की।च

    वर्ष 2009 में हुए इस हादसे में पानीपत की एक महिला की मौत हो गई थी, जिसके बाद उसके परिजनों को मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) द्वारा सीमित मुआवजा दिया गया था।

    इस फैसले को चुनौती देते हुए पीड़ित परिवार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस हरकेश मनुजा ने कहा कि गृहिणी की काल्पनिक आय निर्धारित करते समय केवल उसकी आय को ही नहीं, बल्कि उसके द्वारा घर के लिए किए जाने वाले कार्यों और उससे होने वाली बचत को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    अदालत ने कहा कि एक गृहिणी अपने पति, बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को जो भावनात्मक सहयोग देती है, उसका मूल्यांकन किसी भी आर्थिक पैमाने पर नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने पाया कि एमएसीटी द्वारा महिला की मासिक आय मात्र 5000 रुपये आंकना वास्तविकता से परे था। सभी तथ्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण करने के बाद हाई कोर्ट ने माना कि एक गृहिणी के रूप में उसकी अनुमानित आय कम से कम 8000 रुपये प्रतिमाह होनी चाहिए थी। इसी आधार पर अदालत ने मुआवजे की राशि को 4.55 लाख रुपये से बढ़ाकर 16.92 लाख रुपये कर दिया।

    दरअसल, दुर्घटना के बाद मृतक महिला सहित अन्य दो पीड़ितों के परिजनों ने पानीपत स्थित एमएसीटी के समक्ष दावा दायर किया था। दिसंबर 2010 में न्यायाधिकरण ने महिला के पक्ष में मुआवजा पारित किया, जबकि बीमा कंपनी ने दुर्घटना या वाहन चालक की लापरवाही से इन्कार नहीं किया था। बावजूद इसके, पीड़ित परिवार ने मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए उच्च न्यायालय में अपील की।

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