हादसे में 100% दिव्यांग पटियाला के डाॅक्टर को हाई कोर्ट से राहत, मुआवजा 22.91 से बढ़कर 51.64 लाख हुआ
हाई कोर्ट ने सड़क हादसे में 100 प्रतिशत दिव्यांग डाक्टर का मुआवजा 22.91 लाख से बढ़ाकर 51.64 लाख रुपये किया। विदेश में इलाज के खर्च को भी मान्य माना। ...और पढ़ें

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HighLights
हाई कोर्ट ने डॉक्टर का मुआवजा 22.91 से 51.64 लाख बढ़ाया।
गंभीर घायल को विदेश में इलाज कराना अनुचित नहीं: कोर्ट।
बीमा कंपनी वाहन मालिक, चालक से मुआवजा वसूलेगी।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग हुए डाॅक्टर को 22.91 लाख रुपये से बढ़ाकर 51.64 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि गंभीर रूप से घायल मरीज को बेहतर इलाज के लिए विदेश ले जाना अनुचित नहीं है। यह घायल का अधिकार और परिवार का कर्तव्य है कि उसकी जान बचाने के लिए सर्वोत्तम चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए।
हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि दुर्घटना के समय कार चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। इसलिए बीमा कंपनी पहले पूरा मुआवजा अदा करेगी, लेकिन बाद में वाहन मालिक और चालक से इसकी वसूली का अधिकार उसे होगा। यह फैसला जस्टिस अमरजोत भट्टी ने दो अपीलों का संयुक्त निपटारा करते हुए सुनाया।
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2012 में हुई थी दुर्घटना
यह मामला 15 अगस्त 2012 को पटियाला जिले के नभा-भादसों मार्ग पर हुए सड़क हादसे से संबंधित है। उस समय 53 वर्षीय डा. जरनैल सिंह धालीवाल अपनी मोटरसाइकिल पर कृषि भूमि देखकर लौट रहे थे। आरोप है कि पीछे से तेज रफ्तार में आई इंडिका कार ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी।
इस हादसे में उन्हें गंभीर मस्तिष्क चोट, मस्तिष्क में रक्तस्राव, सेरेब्रल एडिमा, कई पसलियों और दाहिनी कॉलर बोन में फ्रैक्चर सहित अनेक गंभीर चोटें आईं। उन्हें पहले सिविल अस्पताल, नाभा और फिर राजिंदरा अस्पताल, पटियाला ले जाया गया।
बाद में उनका करीब डेढ़ माह तक कोलंबिया एशिया अस्पताल, पटियाला में इलाज चला, जहां वे लगभग चार सप्ताह तक आईसीयू में भर्ती रहे। मेडिकल बोर्ड ने उन्हें 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग घोषित किया।
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डॉक्टरों की सलाह से गए विदेश
डाॅ.धालीवाल के पुत्र बलविंदर सिंह ने अदालत को बताया कि भारत के कई अस्पतालों में उपचार के बावजूद सुधार नहीं हुआ। चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित क्लीनिकास अस्पताल ले जाया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उनका उपचार किया। बीमा कंपनी ने विदेश में इलाज और हवाई यात्रा का खर्च देने का विरोध किया, यह कहते हुए कि भारत में भी उपचार उपलब्ध था।
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हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि गंभीर रूप से घायल मरीज को उन्नत चिकित्सा के लिए विदेश ले जाना अनुचित नहीं है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि घायल का एक बेटा अमेरिका में चिकित्सक है और वहां के इलाज का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड मौजूद है।
अतिरिक्त मुआवजा देने के आदेश
अदालत ने पाया कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने भविष्य की आय के नुकसान, जीवन की सुविधाओं के नुकसान, परिचारक खर्च, भविष्य के इलाज, विशेष आहार और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण मदों में पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया था। कुल मिलाकर, अदालत ने 51,64,530 रुपये का मुआवजा निर्धारित किया और पहले दिए गए 22,91,040 रुपये घटाने के बाद 28,73,490 रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया।