Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    'मजीठिया की सुरक्षा में ढिलाई बर्दाश्त नहीं...', हाईकोर्ट ने केंद्र-पंजाब सरकार से सीलबंद लिफाफे में मांगी रिपोर्ट

    Updated: Wed, 18 Feb 2026 09:28 AM (GMT+05:30)

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बिक्रम सिंह मजीठिया की सुरक्षा को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार को उनके जीवन पर संभावित खतरे का नया आकलन करने का निर्देश दि ...और पढ़ें

    मजीठिया की सुरक्षा पर केंद्र व पंजाब को नया आकलन करने का आदेश। फाइल फोटो

    मजीठिया की सुरक्षा पर केंद्र व पंजाब को नया आकलन करने का आदेश। फाइल फोटो

    HighLights

    1. हाईकोर्ट ने मजीठिया की सुरक्षा का नया खतरा आकलन मांगा

    2. केंद्र और पंजाब सरकार को सीलबंद रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

    3. मौजूदा सुरक्षा पर सवाल, लापरवाही पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंगलवार को केंद्र सरकार और पंजाब सरकार को उनके जीवन पर संभावित खतरे का नया आकलन करने का निर्देश दिया है।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि ताजा खतरा मूल्यांकन रिपोर्ट अगली सुनवाई पर सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाए और उनकी सुरक्षा में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। पीठ ने पंजाब सरकार से पूछा कि जेल से रिहाई के बाद मजीठिया की सुरक्षा को लेकर कोई खतरा आकलन किया गया है या नहीं।

    राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में स्पष्ट जानकारी न दिए जाने पर अदालत ने असंतोष व्यक्त किया और कहा कि सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर ठोस और अपडेट जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है। सरकार ने बताया कि वर्तमान में मजीठिया की सुरक्षा के लिए 15 पुलिस कर्मी तैनात हैं।

    इस पर अदालत ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि उपलब्ध खतरे के स्तर को देखते हुए क्या यह सुरक्षा पर्याप्त है या नहीं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मजीठिया को भी सीलबंद लिफाफे में उनके जीवन पर खतरे की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाए।

    खबरें और भी

    हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि पंजाब के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक के साथ समन्वय कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें, जिसमें खतरे के स्तर, खुफिया एजेंसियों से प्राप्त इनपुट और सुरक्षा के लिए प्रस्तावित अतिरिक्त उपायों का स्पष्ट उल्लेख हो।

    साथ ही केंद्र सरकार को भी संबंधित एजेंसियों के माध्यम से स्वतंत्र रूप से खतरा मूल्यांकन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नई समीक्षा पूरी होने तक मजीठिया की सुरक्षा व्यवस्था में ढिलाई या कमी स्वीकार नहीं की जाएगी।

    यदि सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई छह मार्च निर्धारित की गई है। इस दिन केंद्र और राज्य सरकारों को संयुक्त और अलग-अलग खतरा मूल्यांकन रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।