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34 साल की सेवा के बाद पेंशन से इनकार, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नगर परिषद के अधिकारियों को लगाई फटकार

Published: Sat, 30 May 2026 08:00 AM (IST)

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 34 साल से अधिक सेवा देने वाले एक रिटायर्ड कर्मचारी को पेंशन जारी करने का आदेश दिया है।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने रिटायर्ड कर्मचारी को पेंशन देने का आदेश दिया

  2. नगर परिषद के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई

  3. 34 साल की पूरी सेवा को पेंशन योग्य माना जाएगा

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 34 साल से अधिक सेवा देने वाले एक रिटायर्ड कर्मचारी को पेंशन जारी करने की बड़ी राहत देते हुए नगर परिषद के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि किसी कर्मचारी की पूरी सेवा को नजरअंदाज कर पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता और प्रशासनिक अधिकारी मनमाने ढंग से विरोधाभासी आदेश जारी नहीं कर सकते।

याचिकाकर्ता कमलजीत सिंह की नियुक्ति 9 अक्टूबर 1980 को पंजाब वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड में रिगमैन के रूप में हुई थी। बाद में उनका पदनाम पंप ऑपरेटर किया गया और 1991 में उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं। इसके बाद 1998 में नगर परिषद ने बोर्ड के मेंटेनेंस कार्य अपने अधीन ले लिए और स्थायी कर्मचारियों को परिषद में समाहित कर लिया गया। कमलजीत सिंह भी नगर परिषद में नियमित वेतनमान पर कार्य करने लगे। उन्होंने 30 जून 2016 को सेवानिवृत्ति प्राप्त की, लेकिन उन्हें पेंशन नहीं दी गई।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने अपने आदेश में कहा कि किसी कर्मचारी की दशकों लंबी सेवा को तकनीकी आधारों पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता द्वारा पंजाब वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड तथा बाद में नगर परिषद में दी गई पूरी सेवा को पेंशन योग्य सेवा माना जाएगा। हाईकोर्ट ने विशेष तौर पर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी के रवैये पर आपत्ति जताई।

अदालत ने कहा कि एक ही मामले में दो महीने के भीतर दो परस्पर विरोधी आदेश पारित करना प्रशासनिक लापरवाही और कानून की समझ की कमी दर्शाता है।पहले आदेश में कर्मचारी की पेंशन इस आधार पर खारिज की गई कि उसने पेंशन नियमों के तहत जरूरी विकल्प नहीं भरा और योगदान राशि जमा नहीं कराई।

लेकिन दो महीने बाद उसी अधिकारी ने दूसरा आदेश जारी कर कहा कि संबंधित कर्मचारी नगर परिषद का कर्मचारी ही नहीं था, इसलिए वह पेंशन का हकदार नहीं है। अदालत ने कहा कि इस तरह के आदेश न केवल गैर-जिम्मेदाराना हैं बल्कि इनके गंभीर नागरिक परिणाम होते हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक आदेशों को मनमाने तरीके से बदला नहीं जा सकता। अदालत ने नगर परिषद को निर्देश दिया कि कर्मचारी की संपूर्ण सेवा अवधि को गिनते हुए पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ जारी किए जाएं। हाईकोर्ट ने नगर परिषद को निर्देश दिया कि कर्मचारी द्वारा पहले लिए गए सीपीएफ लाभ की वापसी के लिए जरूरी राशि की जानकारी चार सप्ताह में दी जाए ताकि पेंशन और अन्य लाभ जारी किए जा सकें।







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