चंडीगढ़ की विरासत पर अंतरराष्ट्रीय 'बोली', पियरे जेनरेट के डिजाइन किए फर्नीचर की नीलामी पर रार
चंडीगढ़ की ऐतिहासिक पियरे जेनरेट द्वारा डिज़ाइन की गई विरासत फर्नीचर वस्तुओं की विदेशों में लगातार हो रही नीलामी पर अधिवक्ता अजय जग्गा ने विदेश मंत्री ...और पढ़ें

अजय जग्गा की विदेश मंत्री और संस्कृति मंत्री से तत्काल दखल की मांग (फोटो: जागरण)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। चंडीगढ़ की ऐतिहासिक विरासत मानी जाने वाली पियरे जेनरेट का डिजाइन किया गया फर्नीचर वस्तुओं की विदेशों में लगातार हो रही नीलामी को लेकर अब मामला केंद्र सरकार तक पहुंच गया है।
सेक्टर-21 निवासी एवं एडवोकेट अजय जग्गा ने भारत सरकार के विदेश मंत्री एस जयशंकर और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है।
अपने प्रतिनिधित्व में अजॉय जग्गा ने कहा कि 21 अप्रैल 2026 को यूनाइटेड किंगडम के स्टैन्स्टेड माउंटफिचेट स्थित स्वाडर्स द्वारा चंडीगढ़ से जुड़े विरासत फर्नीचर की फिर से नीलामी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर का लगातार विदेशों में बिखराव है और इस पर अब तक प्रभावी अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई नहीं हुई है।
पियरे जेनरेट द्वारा डिजाइन किया फर्नीचर नीलाम
पत्र के अनुसार नीलाम हुई वस्तुओं में पियरे जेनरेट द्वारा डिजाइन किया गया डे-बेड, पिजनहोल डेस्क, फाइल रैक तथा पंजाबी लिपि अंकित चार कुर्सियों का सेट शामिल था। इन वस्तुओं की कुल नीलामी राशि लगभग 20,800 पाउंड यानी करीब 21.84 लाख रुपये बताई गई है।
अजय जग्गा ने कहा कि ये फर्नीचर मूल रूप से चंडीगढ़ कैपिटल प्रोजेक्ट एवं सरकारी संस्थानों के लिए तैयार किए गए थे, इसलिए यह केवल फर्नीचर नहीं बल्कि भारत की सार्वजनिक एवं सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं।
उन्होंने चिंता जताई कि विदेशी नीलामी घर अब इन वस्तुओं पर मौजूद पंजाब एवं चंडीगढ़ से जुड़े मूल निशानों को भी खुले तौर पर प्रदर्शित कर रहे हैं, जिससे भारत का दावा और मजबूत होता है, फिर भी कोई ठोस आपत्ति या वापसी प्रक्रिया दिखाई नहीं दे रही।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि विदेशों में स्थित सभी भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों को ऐसे मामलों के प्रति तुरंत संवेदनशील बनाया जाए। साथ ही एक औपचारिक SOP जारी कर अंतरराष्ट्रीय नीलामी घरों की निगरानी, भारतीय विरासत वस्तुओं की पहचान और समय रहते कानूनी या कूटनीतिक हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जाए।
खबरें और भी
अजय जग्गा ने यह भी मांग की कि विदेश मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के बीच समन्वित तंत्र स्थापित किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी नीलामियों पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। साथ ही यह जांच भी हो कि सरकारी निशानयुक्त ये वस्तुएं बार-बार विदेश कैसे पहुंच रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह मामला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “विकसित भी, विरासत भी” विजन के विपरीत है और यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो चंडीगढ़ की अमूल्य विरासत निजी विदेशी संग्रहों में हमेशा के लिए बिखर सकती है।
नीलाम हुई वस्तुओं का विवरण
नीलामी में शामिल वस्तुएं पियरे जेनरेट द्वारा चंडीगढ़ कैपिटल प्रोजेक्ट और सरकारी संस्थानों के लिए डिजाइन की गई थीं। इनमें शामिल हैं—
| लॉट नंबर | वस्तु का नाम | मार्किंग/विशेषता | अनुमानित वर्ष | नीलामी राशि (पाउंड में) |
| 178 | डे-बेड (Day-bed) | NIS/WHB/48 | लगभग 1960 | 4,200 पाउंड |
| 177 | पिजनहोल डेस्क (Pigeonhole Desk) | PJ-BU-02-A | लगभग 1957 | 7,500 पाउंड |
| 176 | फाइल रैक (File Rack) | P.B.S.-005 | लगभग 1955 | 5,500 पाउंड |
| 175 | चार कुर्सियों का सेट | पंजाबी लिपि अंकित | लगभग 1955-56 | 3,600 पाउंड |
इन सभी वस्तुओं की कुल नीलामी राशि लगभग 20,800 पाउंड यानी करीब 21.84 लाख रुपये बताई गई है।