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    खेल सत्र के बीच बदले गए MAKA ट्रॉफी के नियम, पंजाब की यूनिवर्सिटीज ने निष्पक्षता पर उठाए सवाल

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 09:48 PM (GMT+05:30)

    मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफी और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के नियमों में सत्र के बीच बदलाव से विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि इन बदलावों से एक नि ...और पढ़ें

    MAKA ट्रॉफी और खेलो इंडिया नियमों में बदलाव पर पंजाब यूनिवर्सिटीज ने उठाए सवाल

    MAKA ट्रॉफी और खेलो इंडिया नियमों में बदलाव पर पंजाब यूनिवर्सिटीज ने उठाए सवाल

    HighLights

    1. नियमों में बदलाव से निजी विश्वविद्यालय को मिला अनुचित लाभ।

    2. KIUG वेटेज बढ़ने से सरकारी विश्वविद्यालय हुए प्रभावित।

    3. गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी ने निष्पक्ष जांच की मांग की।

    डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। देश के प्रतिष्ठित खेल आयोजनों में से एक, 'खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स' (KIUG) 2025 विवादों के घेरे में आ गया है। अमृतसर स्थित गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (GNDU) के कुलपति प्रोफेसर करमजीत सिंह ने खेल मंत्रालय को पत्र लिखकर खेलों के दौरान हुई गंभीर अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

    यूनिवर्सिटी के मुख्य आरोप और आपत्तियां:

    अपात्र खिलाड़ियों की भागीदारी

    शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) की एक एथलीट, सुश्री रीमा भोई ने अंडर-58 किलोग्राम भारोत्तोलन (Weightlifting) स्पर्धा में हिस्सा लिया, जबकि वह ओडिशा के एक संस्थान (TPCODL) में स्थायी रूप से कार्यरत हैं। नियमों के अनुसार, कार्यरत व्यक्ति छात्र-एथलीट के रूप में भाग नहीं ले सकता।

    नियमों के विरुद्ध खिलाड़ियों का बदलाव

    शूटिंग स्पर्धाओं (10 मीटर एयर पिस्टल और राइफल) में आरोप है कि LPU ने अपात्र खिलाड़ियों को मौका दिया। सुश्री अंजलि शेखावत, जो आधिकारिक तौर पर योग्य थीं, उनके स्थान पर सुश्री मानसी आनंद को खिलाया गया। इसी तरह, सुश्री साक्षी ने 10 मीटर एयर राइफल में गोल्ड मेडल जीता, जबकि वह योग्यता सूची में 21वें स्थान पर थीं और केवल शीर्ष 8 एथलीट ही इस स्पर्धा के लिए पात्र थे।

    प्रशासनिक मिलीभगत और पक्षपात

    यूनिवर्सिटी का आरोप है कि आयोजकों और राष्ट्रीय कोचों ने एथलीटों पर दबाव बनाया और नियमों की अनदेखी कर चुनिंदा निजी संस्थानों को फायदा पहुँचाया। GNDU का दावा है कि उनके द्वारा समय पर की गई शिकायतों और दस्तावेजों को आयोजन समिति ने नजरअंदाज कर दिया।

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    मेडल और रैंकिंग पर सवाल

    यूनिवर्सिटी ने मांग की है कि नियमों का उल्लंघन कर जीते गए सभी मेडलों को तत्काल रद्द किया जाए। रिपोर्टों के अनुसार, नियमों में अंतिम समय पर किए गए बदलावों से पदक तालिका का संतुलन बिगड़ा है। आरोप है कि एक खास निजी यूनिवर्सिटी, जिसके मेडल पिछले सत्रों में बहुत कम थे, इस बार अचानक बढ़कर 42 तक पहुँच गए हैं।

    MAKA ट्रॉफी की गरिमा पर खतरा

    पत्र में कहा गया है कि इन अनियमितताओं से न केवल खेलों की निष्पक्षता प्रभावित हुई है, बल्कि देश की सबसे प्रतिष्ठित मौलाना अबुल कलाम आज़ाद (MAKA) ट्रॉफी की गरिमा को भी ठेस पहुँची है। GNDU ने खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।