क्या है मोदी-तिवारी की मुलाकात का संदेश? मंच पर दिखी नजदीकी से बढ़ी चर्चाएं, चंडीगढ़ की राजनीति में बदलाव के कयास
प्रधानमंत्री मोदी ने चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम में सांसद मनीष तिवारी से मुलाकात की, जिससे उनकी नजदीकियों और राजनीतिक कयासों को बल मिला। यह मुलाकात तिवा ...और पढ़ें

समारोह खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी खुद मनीष तिवारी के पास रुके। हाथ मिलाया और बातचीत की। फोटो : उपेंद्र सेन गुप्ता
HighLights
परियोजनाओं के शिलापट्ट पर भी मनीष तिवारी का नाम।
स्टेज पर मात्र पांच ही कुर्सियां थी, इनमें एक सांसद की।
पीएम ने कहा- ‘लोकसभा में हमारे साथी मनीष तिवारी’।
बलवाल करिवाल, चंडीगढ़। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) में विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने के लिए पहुंचे थे। मंच पर पीएम और सांसद मनीष तिवारी की नजदीकियों ने चर्चाएं बढ़ा दी। साथ ही चंडीगढ़ की राजनीति में बदलाव के कयास लगाने जाने लगे।
समारोह में स्टेज पर मात्र पांच ही कुर्सियां लगाई गई थी। एक कुर्सी पर चंडीगढ़ से कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी भी मौजूद थे। समारोह में प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मनीष तिवारी को पूरा महत्व दिया।
प्रधानमंत्री ने तो यहां तक कहा ‘लोकसभा में हमारे साथी मनीष तिवारी’, हालांकि नड्डा ने अपने संबोधन में तिवारी को सांसद कह कर ही संबोधित किया। अहम बात यह रही कि समारोह खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद मनीष तिवारी के पास रुके।
उन्होंने तिवारी से हाथ भी मिलाया और कुछ समय तक दोनों लोग बातें करते रहे। इस दौरान उनके करीब कोई भी नहीं था। इस मुलाकात के बाद से ही तिवारी के भाजपा के साथ मधुर संबंधों को लेकर चर्चा भी शुरू हो गई। चर्चा इसलिए भी क्योंकि पहले कई कार्यक्रमों से मनीष तिवारी ने दूरी बनाए रखी थी।
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फिर चाहे तीन कानूनों की शुरुआत का कार्यक्रम हो या 24 घंटे पानी की परियोजना। तीन कानूनों के क्रियान्वयन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों आए थे। जबकि 24 घंटे पेयजलापूर्ति परियोजना उद्घाटन कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह आए थे।
पंजाब कांग्रेस में चल रहा अंतरकलह
यह सब कुछ ऐसे समय में हुआ जब कुछ दिन पहले ही पंजाब कांग्रेस में चल रहे अंतरकलह और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को प्रधान बनाने के बजाय कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाने व पंजाब कांग्रेस में तवज्जों नहीं दिए जाने को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने अपनी नाराजगी भी दिखाई थी।
इस पोस्ट से चर्चा में आए थे मनीष तिवारी
मनीष तिवारी ने अपने एक्स पोस्ट पर नाराजगी जताते हुए लिखा था ‘काबिल होना ही अपने आप में एक बड़ी कमी है। काश मेरे पास लोगों और संस्थाओं की असुरक्षा की भावना को दूर करने का कोई तरीका होता। कांग्रेस ने पिछले 45 वर्षाें में मुझे बहुत कुछ दिया है और मैंने भी अपनी पूरी जवानी पार्टी की सेवा में समर्पित कर दी। किस्मत को कौन टाल सकता है। जो होना है, वह तो होकर रहेगा।’
सीट बदलना और चुनाव नहीं लड़ना भी बना सुर्खियां
तिवारी को कांग्रेस पार्टी में प्रमुखता नहीं मिलने की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं। उनके भाजपा के करीब होने की भी चर्चा भी थमती नहीं है। बता दें कि 2014 में मनीष तिवारी सांसद रहते हुए लुधियाना से लोकसभा का चुनाव नहीं लड़े थे। जिसके बाद कांग्रेस ने उनके स्थान पर रवनीत सिंह बिट्टू को प्रत्याशी बनाया था।
इसके बाद से ही तिवारी राहुल गांधी की गुड बुक से बाहर हो गए थे। 2019 के लोक सभा चुनाव में राहुल मनीष तिवारी को टिकट नहीं देना चाहते थे लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह के अड़ने से उन्हें श्री आनंदपुर साहिब से चुनाव लड़वाया। चुनाव जीतने के बाद 2024 में मनीष तिवारी ने पंजाब छोड़ दिया और वह चंडीगढ़ से चुनाव लड़े और जीते।
मोदी की तव्वजो से छिड़ी चर्चा
तिवारी ने भले ही शुक्रवार को बतौर सांसद प्रधानमंत्री के साथ स्टेज पर थे लेकिन मोदी ने जिस प्रकार से उन्हें तवज्जों दी, उसके बाद से उनकी नजदीकियों की चर्चा छिड़ गई है। केवल तव्वजो देने से ही नहीं सभी परियोजनाओं के शिलापट्ट पर भी मनीष तिवारी का नाम अंकित किया गया है।