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    ऑफिस बंद, पैसा गायब…नए नाम से फिर सक्रिय हो जाते इमिग्रेशन एजेंट; मोहाली में खूब चल रहा धंधा, पुलिस पर मिलीभगत के आरोप

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 07:00 AM (IST)

    ज़ीरकपुर और डेराबस्सी में विदेश भेजने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले इमिग्रेशन एजेंट ऑफिस बंद कर नए नाम से फिर सक्रिय हो जाते हैं। पीड़ितों की जीव ...और पढ़ें

    जीरकपुर और डेराबस्सी क्षेत्र में तेजी से फैल रहे इमिग्रेशन कारोबार और फर्जी ट्रैवल एजेंटों का जाल।

    जीरकपुर और डेराबस्सी क्षेत्र में तेजी से फैल रहे इमिग्रेशन कारोबार और फर्जी ट्रैवल एजेंटों का जाल।

    HighLights

    1. कई इमिग्रेशन कार्यालय विवादों में रह चुके।

    2. कई लोगों की जीवनभर की कमाई डूबी।

    3. शिकायत के बावजूद न्याय नहीं मिलता।

    मेजर अली, जीरकपुर (मोहाली)। जीरकपुर और डेराबस्सी क्षेत्र में तेजी से फैल रहे इमिग्रेशन कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में बड़ी संख्या में संचालित इमिग्रेशन कार्यालयों में से कई पर बिना आवश्यक अनुमति, नियमों के उल्लंघन और विदेश भेजने के नाम पर लोगों से लाखों-करोड़ों रुपये वसूलने के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि कई कंपनियां आकर्षक दफ्तर खोलकर विदेश में बेहतर भविष्य का सपना दिखाती हैं, लेकिन कुछ समय बाद कार्यालय बंद कर संचालक फरार हो जाते हैं। इससे पीड़ित परिवारों की जीवनभर की जमा पूंजी डूब जाती है।

    क्षेत्र में पहले भी कई इमिग्रेशन कार्यालय विवादों में रह चुके हैं। कुछ मामलों में कार्यालयों पर फायरिंग जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं, जिससे इस कारोबार से जुड़े विवाद और प्रतिस्पर्धा पर भी सवाल उठे हैं। हालांकि इन घटनाओं के पीछे अलग-अलग कारण सामने आए, लेकिन इससे लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।

    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई एजेंट विदेश में नौकरी, वर्क परमिट, स्टडी वीजा या अन्य माध्यमों से भेजने का दावा करते हैं और बड़ी रकम एडवांस के रूप में ले लेते हैं। बाद में या तो वीजा नहीं लगता, या एजेंट संपर्क तोड़ देते हैं। कई मामलों में शिकायतें दर्ज होने के बावजूद पीड़ितों को वर्षों तक न्याय नहीं मिल पाता।

    लोगों का कहना है कि ऐसे कार्यालयों की नियमित जांच, लाइसेंस, पंजीकरण, पुलिस सत्यापन और वित्तीय लेन-देन की निगरानी जरूरी है। उनका आरोप है कि कार्रवाई अक्सर कुछ समय के लिए अभियान तक सीमित रहती है और बाद में स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।

    विदेश जाने के लिए अवैध रास्तों (डंकी रूट) का सहारा लेने वाले कई युवाओं के मामले भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। अमेरिका समेत कई देशों से भारतीय नागरिकों की वापसी के मामलों के बाद भी क्षेत्र में सक्रिय कथित एजेंटों की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे।

    कई परिवारों का आरोप है कि उन्हें झूठे वादों के जरिए लाखों रुपये खर्च करने पड़े, लेकिन न विदेश पहुंच सके और न ही उनकी रकम वापस मिली। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जीरकपुर और डेराबस्सी में संचालित सभी इमिग्रेशन कार्यालयों का व्यापक सत्यापन कराया जाए।

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    बिना वैध लाइसेंस या आवश्यक दस्तावेजों के संचालन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों पर शिकंजा कसकर पीड़ितों को राहत दिलाई जाए।

    गाइडेंस लाइसेंस की आड़ में करोड़ों की ठगी का खेल

    जीरकपुर और डेराबस्सी में कई इमिग्रेशन एजेंटों को केवल लोगों को गाइड करने या जानकारी देने तक की अनुमति बताई जाती है, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद कुछ एजेंट खुद फाइल भरने, विदेश भेजने और वीजा लगवाने के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं। लोग अपनी जिंदगीभर की कमाई एजेंटों को सौंप देते हैं, लेकिन बाद में कई दफ्तर अचानक बंद हो जाते हैं।

    आरोप यह भी है कि कुछ संचालक पुराना ऑफिस बंद कर नए नाम से दोबारा दफ्तर खोल लेते हैं और फिर नए लोगों को विदेश भेजने के सपने दिखाकर लाखों-करोड़ों रुपये ऐंठते हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से ऐसे सभी इमिग्रेशन कार्यालयों की लाइसेंस जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    लोगों का आरोप : पुलिस की मिलीभगत से फल-फूल रहे इमिग्रेशन एजेंट

    जीरकपुर और डेराबस्सी में अवैध इमिग्रेशन एजेंटों को लेकर लोगों में भारी रोष है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतें देने के बावजूद ऐसे एजेंटों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

    लोगों का कहना है कि बिना पुलिस और संबंधित विभागों की मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर अवैध इमिग्रेशन कारोबार फल-फूल नहीं सकता। शिकायतों के बाद भी कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित रहती है, जबकि एजेंट लोगों को विदेश भेजने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठकर ऑफिस बंद कर फरार हो जाते हैं। लोगों ने मांग की कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए।