15 साल बाद फिर खुली तारी हत्याकांड की फाइल, AK-47 से छलनी करने वाले अब भी फरार; CBI ने इनाम घोषित किया
करीब 15 वर्ष पुराने अवतार सिंह तारी हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने संदिग्ध का स्केच जारी कर दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। दिनदहाड़े हुई इ ...और पढ़ें

नामधारी अवतार सिंह तारी मामले में सीबीआई की तरफ से जारी किया गया स्केच।
HighLights
सीबीआई ने 15 साल बाद तारी हत्याकांड की जांच फिर खोली।
संदिग्ध का स्केच जारी, सूचना पर दो लाख का इनाम।
नामधारी संप्रदाय में उत्तराधिकार विवाद से जुड़ा था मामला।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। नामधारी संप्रदाय में उत्तराधिकार की जंग ने वर्ष 2011 में ऐसा खूनी मोड़ लिया था, जिसने पूरे पंजाब को झकझोर कर रख दिया। संप्रदाय के प्रभावशाली सेवादार, कारोबारी और अंदरूनी शक्ति संतुलन में अहम भूमिका निभाने वाले अवतार सिंह तारी की दिनदहाड़े एके-47 से गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी। वारदात को अंजाम देने वाले हमलावर आज भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं।
अब करीब 15 साल पुराने इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच को नया मोड़ देते हुए एक मुख्य संदिग्ध का स्केच जारी किया है और मामले को सुलझाने में मददगार सूचना देने वाले के लिए दो लाख रुपये इनाम की घोषणा की है।
सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच (एससीबी), चंडीगढ़ का मानना है कि यह मामला केवल एक हत्या नहीं, बल्कि नामधारी संप्रदाय के भीतर वर्षों से चल रहे वर्चस्व संघर्ष की सबसे हिंसक अभिव्यक्ति था। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति आरोपितों तक पहुंचाने वाली विश्वसनीय जानकारी देगा, उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
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धार्मिक व समाजिक प्रभाव वाले थे तारी
अवतार सिंह तारी केवल धार्मिक गतिविधियों से जुड़े व्यक्ति नहीं थे। खेती, रियल एस्टेट और सामाजिक प्रभाव के कारण उनकी पहचान एक मजबूत नेटवर्क वाले प्रभावशाली व्यक्ति की थी। नामधारी संप्रदाय के पूर्व प्रमुख सतगुरु जगजीत सिंह के निधन के बाद जब उत्तराधिकार को लेकर अलग-अलग गुट सक्रिय हुए, तब तारी एक अहम शक्ति केंद्र के रूप में उभरे।
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उनका झुकाव सतगुरु जगजीत सिंह के दामाद संत जगतार सिंह के धड़े की ओर माना जाता था। इसी कारण विरोधी खेमे में उनका प्रभाव लगातार चुनौती के रूप में देखा जाने लगा।
11 गोलियां शरीर के आर-पार हुई थीं
12 अप्रैल 2011 की सुबह अवतार सिंह तारी अपनी टोयोटा कोरोला कार में मोहाली से श्री भैणी साहिब के लिए रवाना हुए थे। रोज की तरह यह एक सामान्य यात्रा लग रही थी, लेकिन उन्हें अंदेशा होने लगा कि कुछ लोग उनका पीछा कर रहे हैं। सुबह करीब 11 बजे जब वह लुधियाना जिले के कटानी कलां गांव के पास पहुंचे, तो शक गहरा गया। उन्होंने एहतियातन एक रिश्तेदार की दुकान पर कार रोक दी।
बताया जाता है कि कुछ मिनट बाद जैसे ही तारी दुकान से बाहर निकले, मोटरसाइकिल सवार दो हमलावर अचानक उनके बेहद करीब पहुंच गए। इसके बाद कुछ सेकंड में ही गोलियों की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। हमलावरों ने एके-47 राइफल से ताबड़तोड़ फायरिंग की और 11 गोलियां तारी के शरीर में उतार दीं। हमला इतना सुनियोजित और घातक था कि उन्हें बचने का कोई मौका नहीं मिला। उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
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पहले भी हो चुकी थी हमले की कोशिश
तत्कालीन जांच में पुलिस ने दावा किया था कि एक हमलावर सफेद कुर्ता-पायजामा और सफेद परना पहने हुए था, जबकि दूसरा हरे रंग की पैंट में देखा गया। शुरुआती जांच से यह भी सामने आया कि तारी पर इससे पहले भी दो बार हमला करने की कोशिश की जा चुकी थी। यानी हमलावर लंबे समय से अवसर की तलाश में थे। मोहाली में इन कोशिशों से जुड़े दो मामले भी दर्ज किए गए थे।
हत्या के बाद परिवार ने सीधे तौर पर इस वारदात को नामधारी संप्रदाय के भीतर चल रही सत्ता की लड़ाई से जोड़ा। अवतार सिंह तारी के बहनोई बलवंत सिंह के बयान पर साहनेवाल थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया। शिकायत में ठाकुर दलीप सिंह और उनके समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए गए। मामला लगातार सुर्खियों में रहा और राजनीतिक-सामाजिक दबाव बढ़ने के बाद जांच स्थानीय पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दी गई।
सीबीआई ने फिर खंगालने शुरू किए तथ्य
सीबीआई ने 9 जनवरी 2017 को औपचारिक रूप से केस दर्ज किया और कई एंग्लो से जांच शुरू की। एजेंसी ने पुराने बयान, तकनीकी साक्ष्य और घटनाक्रम की दोबारा पड़ताल की, लेकिन वर्षों बाद भी हत्या की गुत्थी पूरी तरह नहीं सुलझ सकी। अब स्केच जारी कर सीबीआई ने संकेत दिया है कि जांच फिर सक्रिय चरण में पहुंच चुकी है।
इस हत्याकांड के बाद भी नामधारी संप्रदाय का विवाद शांत नहीं हुआ। वर्ष 2016 में संप्रदाय के पूर्व प्रमुख की पत्नी माता चंद कौर की भी अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इन घटनाओं ने साफ कर दिया कि उत्तराधिकार का संघर्ष केवल वैचारिक या संगठनात्मक नहीं रहा, बल्कि खूनी टकराव में बदल चुका था।
करीब डेढ़ दशक बाद भी अवतार सिंह तारी हत्याकांड पंजाब के सबसे रहस्यमय और चर्चित मामलों में गिना जाता है।