PU में पीएचडी स्कॉलर ज्योति की मौत का कौन जिम्मेदार? मजिस्ट्रियल जांच में खुलेगा राज; तीन सदस्यीय समिति देगी रिपोर्ट
पंजाब विश्वविद्यालय में पीएचडी शोधार्थी ज्योति की करंट लगने से हुई मौत पर जिला मजिस्ट्रेट ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। तीन सदस्यीय समिति एक सप ...और पढ़ें

पीयू परिसर में पीएचडी स्कॉलर ज्योति की करंट लगने से हुई थी मौत।
HighLights
28 जुलाई को परिसर में ही करंट से हो गई थी मौत।
लापरवाही, सुरक्षा व्यवस्था की खामियों की होगी पड़ताल।
तीन सदस्यीय समिति एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपेगी।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) परिसर में पीएचडी स्कॉलर ज्योति की 28 जुलाई को करंट लगने से हुई मौत के मामले में जिला मजिस्ट्रेट निशात यादव ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं। इस मामले को लेकर प्रशासक भी गंभीर हैं।
घटना के कारणों, परिस्थितियों और संभावित जिम्मेदारियों का पता लगाने के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति को आदेश जारी होने की तिथि से एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश के अनुसार समिति की अध्यक्षता यूटी चंडीगढ़ के समाज कल्याण निदेशक नवीन रत्तू करेंगे। समिति में डीएसपी (ट्रैफिक) लक्षय पांडे और एक्सईएन (इलेक्ट्रिकल) गुरप्रीत सिंह बैंस सदस्य होंगे।
समिति को यह पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई, मौत का तात्कालिक और वास्तविक कारण क्या था, और इसमें किसी व्यक्ति, अधिकारी, विभाग, एजेंसी या संस्थान की लापरवाही, चूक या जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
जांच समिति विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद सुरक्षा व्यवस्था, रखरखाव प्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की भी समीक्षा करेगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक, निवारक और संस्थागत उपायों की सिफारिश करेगी।
आदेश के अनुसार समिति को घटनास्थल का निरीक्षण करने, संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ करने, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी रिपोर्ट, दस्तावेज और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड जुटाने का पूरा अधिकार होगा।
समिति जांच के दौरान आवश्यक समझे जाने वाले किसी भी अतिरिक्त तथ्य या साक्ष्य को भी अपने दायरे में शामिल कर सकेगी। जिला मजिस्ट्रेट ने पंजाब विश्वविद्यालय प्रशासन को जांच में पूरा सहयोग देने के निर्देश दिए हैं।
अब तक इस घटना के बाद यह हुआ
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मृतक शोधार्थी के परिवार को कुल 16 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। इसमें 5 लाख रुपये कुलपति के विवेकाधीन कोष से और 11 लाख रुपये डीन स्टूडेंट वेलफेयर (डीएसडब्ल्यू) कार्यालय के माध्यम से दिए जाएंगे। इसके साथ ही ज्योति के भाई को इलेक्ट्रीशियन के पद पर नियुक्ति की पेशकश की जाएगी। इसके अलावा दो इंजीनियर्स को संस्पेंड किया गया है।